देहरादून/कोटद्वार। उत्तराखंड हाईकोर्ट में कोटद्वार के चर्चित ‘बाबा दुकान’ विवाद मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताने वाले जिम संचालक दीपक कुमार को निर्देश दिया है कि वे अपने बैंक खाते में प्राप्त सभी दान (चंदे) का विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करें।
साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को जनवरी में हुई घटना से जुड़ी सभी एफआईआर की जांच पर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट में क्या हुआ?
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच पूरी तरह कानून के दायरे में ही की जाएगी।
दीपक कुमार ने अपनी याचिका में दर्ज एफआईआर को रद्द करने, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग की है।
हालांकि, अदालत ने सुरक्षा और विभागीय जांच की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया विधि अनुसार आगे बढ़ेगी।
दान को लेकर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान दीपक ने अदालत को बताया कि 26 जनवरी की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्हें लोगों से 100 से 500 रुपये तक के छोटे-छोटे दान प्राप्त हो रहे हैं।
इस पर कोर्ट ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बैंक खाते में आई कुल राशि का पूरा विवरण शपथपत्र के रूप में पेश करने का आदेश दिया।
क्या है पूरा मामला?
26 जनवरी को कोटद्वार में एक विवाद उस समय सामने आया जब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद की दुकान के नाम ‘बाबा’ पर आपत्ति जताई।
दुकान का नाम ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ है, जो पिछले करीब 30 वर्षों से संचालित बताई जा रही है।
इसी दौरान दीपक कुमार मौके पर पहुंचे और दुकानदार का समर्थन करते हुए नाम बदलने की मांग पर सवाल उठाया। वायरल वीडियो में उन्होंने खुद को “मोहम्मद दीपक” बताया, जिसके बाद मामला और तूल पकड़ गया।
एफआईआर और आरोप
घटना के बाद 28 जनवरी को कमल प्रसाद की शिकायत पर दीपक कुमार और उनके सहयोगी विजय रावत के खिलाफ दुर्व्यवहार, मोबाइल फोन छीनने और आपराधिक धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई।
इसके खिलाफ दीपक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
धार्मिक पृष्ठभूमि भी बनी वजह
कोटद्वार क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध सिद्धबली मंदिर के कारण ‘बाबा’ शब्द स्थानीय दुकानों में आम तौर पर उपयोग होता है।
इसी वजह से इस नाम को लेकर विवाद ने सामाजिक और धार्मिक रंग भी ले लिया।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। इस केस की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है, जहां मामले में आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।













