स्टोरी: कमल जगाती, नैनीताल
उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिरते टूरिज्म को लेकर नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन खुलकर सामने आ गया है। नैनीताल के बोट हाउस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में होटल एसोसिएशन ने पुलिसिंग व्यवस्था, ट्रैफिक प्लान और सरकारी नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए। एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा हालात ऐसे ही रहे तो पर्यटन उद्योग पूरी तरह से चरमरा सकता है।
पुलिस का व्यवहार और ट्रैफिक प्लान पर्यटक विरोधी : दिग्विजय बिष्ट
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय बिष्ट ने कहा कि सरकार एक तरफ पर्यटकों को पहाड़ों में आने का न्योता दे रही है, जबकि दूसरी ओर पुलिस का व्यवहार और ट्रैफिक प्लान पर्यटकों को हतोत्साहित कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वर्ष पुलिसिंग के चलते एक बड़ा फेस्टिवल पूरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे पर्यटन व्यवसाय को भारी नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि नैनीताल, मसूरी और अन्य पर्यटक स्थल इस साल अपेक्षाकृत खाली रहे, लेकिन पुलिस के जरिए यह दिखाया गया कि होटल पूरी तरह भरे हुए हैं और शहरों में भारी जाम लगा है। इससे न केवल पर्यटकों में भ्रम फैला बल्कि वास्तविक हालात छिपा दिए गए।
स्टेक होल्डरों की अनदेखी, राजस्व को नुकसान
दिग्विजय बिष्ट ने कहा कि पुलिस जब पर्यटन से जुड़े लोगों के साथ बैठक करती है, तो सुझाव लेने के बजाय अपना तैयार प्लान थोप दिया जाता है। स्टेक होल्डरों की राय को नजरअंदाज कर गलत ट्रैफिक प्लान लागू किए जाते हैं, जिससे सरकार को भी भारी राजस्व हानि हो रही है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की करीब 50 प्रतिशत आय पर्यटन से आती है, ऐसे में इस सेक्टर की अनदेखी राज्य के लिए घातक साबित हो सकती है।
अवैध होटल और अपंजीकृत होम-स्टे बड़ा खतरा
एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा कि नैनीताल में करीब 400 होटल और होम-स्टे पंजीकृत हैं, जबकि लगभग उतनी ही संख्या में अपंजीकृत प्रॉपर्टी संचालित हो रही हैं। यह न केवल राजस्व बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ा खतरा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अवैध कारोबार पर पुलिस सख्ती क्यों नहीं कर रही।
होम-स्टे स्थानीय लोगों को मिलें, बाहरियों को नहीं
उन्होंने कहा कि होम-स्टे योजना अच्छी है, लेकिन इसका संचालन बाहरी लोगों द्वारा किया जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा। सरकार को इस पर नीति बनानी चाहिए ताकि इसका सीधा फायदा स्थानीय निवासियों को मिले।
फेक रील, खराब सड़कें और बंद एयरपोर्ट भी बने बाधा
होटल एसोसिएशन ने सोशल मीडिया पर चल रही फेक रील्स को भी पर्यटन के लिए नुकसानदायक बताया और इस पर कानून बनाने की मांग की।
इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों की खराब हालत, जगह-जगह गड्ढे और 1976 में बना नैनीताल एयरपोर्ट सही तरीके से संचालित न होना भी पर्यटन में गिरावट की बड़ी वजह बताया गया।
ऑनलाइन फ्रॉड, महंगी पार्किंग और चुंगी से पर्यटक परेशान
चारधाम समेत अन्य पर्यटन स्थलों पर चल रहे ऑनलाइन फ्रॉड पर रोक लगाने की मांग करते हुए एसोसिएशन ने कहा कि महंगी पार्किंग और चुंगी दरें भी पर्यटकों को हतोत्साहित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि चुंगी और पार्किंग के रेट पालिका बोर्ड से पास जरूर हुए हैं, लेकिन इन्हें कम करने के लिए प्रशासन को पत्र भेजा गया है।
पर्यटन नहीं संभला तो सड़कों पर उतरेंगे लोग
होटल एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग लोन की किस्तें नहीं चुका पा रहे हैं। अगर हालात नहीं सुधरे तो लोग मजबूरन सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
उन्होंने कहा कि मसूरी में भी ट्रैफिक प्लान के चलते हालात बेहद खराब हैं।
सीएम से बैठक की मांग
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से सभी स्टेक होल्डरों को बुलाकर इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा करने की मांग की।
उन्होंने कहा, “पर्यटन हमारी रीढ़ की हड्डी है। यदि यही टूट गई तो पहाड़ों की अर्थव्यवस्था भी ढह जाएगी।”
प्रेस वार्ता में ये रहे मौजूद
इस दौरान एसोसिएशन के महासचिव वेद साह, उपाध्यक्ष आलोक साह, कोषाध्यक्ष सी.पी. भट्ट, उप सचिव स्नेह छाबड़ा, पीआरओ रुचिर साह, रमनजीत सिंह, जतिन जेठी सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।










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