Nepal political crisis: नेपाल की राजनीति में शनिवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को चर्चित जेन-जी आंदोलन 2025 मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई ने पूरे देश में सियासी हलचल तेज कर दी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के मुताबिक, साल 2025 में नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं के नेतृत्व में एक व्यापक आंदोलन शुरू हुआ था, जिसे जेन-जी आंदोलन नाम दिया गया। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे इस आंदोलन ने अचानक उग्र रूप ले लिया और हिंसा में बदल गया।
दो दिनों के भीतर 70 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद तत्कालीन सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे। बढ़ते जनदबाव के चलते उस समय की सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी।
गिरफ्तारी कैसे हुई?
पुलिस ने शनिवार सुबह काठमांडू में कार्रवाई करते हुए केपी शर्मा ओली के साथ तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया। दोनों से फिलहाल पूछताछ जारी है और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
जांच आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
हाल ही में गठित उच्च स्तरीय जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में उस समय हालात संभालने में गंभीर लापरवाही की बात कही है। आयोग ने केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक समेत कई अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।
रिपोर्ट में दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान भी बताया गया है।
सरकार का क्या कहना है?
नेपाल की नई सरकार का नेतृत्व कर रहे बालेन शाह ने साफ किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना ही बड़ा नेता क्यों न हो।
ओली का पलटवार
वहीं, केपी शर्मा ओली ने अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगे।
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अभी और तूल पकड़ सकता है। जांच के दायरे में अन्य बड़े अधिकारियों के आने की संभावना है, जिससे नेपाल की राजनीति में आने वाले दिनों में और बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल सकता है।













