Stock Market Crash: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में तेज बिकवाली शुरू हो गई। बीएसई सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 23,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ी कमी आई।
सोमवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुक्रवार के 73,895 के बंद स्तर के मुकाबले 73,734 पर खुला। इसके बाद बिकवाली का दबाव बढ़ता गया और सेंसेक्स 750 अंक से ज्यादा गिरकर 73,138 के स्तर तक पहुंच गया। कुछ ही देर में गिरावट और तेज हुई और इंडेक्स 1,040 अंक से ज्यादा टूटकर 72,854 के स्तर तक पहुंच गया।
इसी तरह एनएसई निफ्टी भी दबाव में रहा। निफ्टी शुक्रवार के 23,140 के बंद स्तर के मुकाबले 23,065 पर खुला और जल्द ही 23,000 के स्तर से नीचे चला गया। कारोबार के दौरान निफ्टी करीब 280 अंक की गिरावट के साथ 22,855 के आसपास कारोबार करता नजर आया।
ज्यादातर बड़े शेयरों में बिकवाली
बाजार में चौतरफा गिरावट का असर दिग्गज कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला। बीएसई लार्जकैप कैटेगरी के 30 में से सभी 30 शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
शुरुआती कारोबार में एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, हिंदुस्तान यूनिलीवर, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
बैंकिंग शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। बीएसई बैंक इंडेक्स करीब 1.60 फीसदी की गिरावट में रहा। वहीं आईटी इंडेक्स में भी लगभग 1.10 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली।
निवेशकों को बड़ा नुकसान
शेयर बाजार में अचानक आई इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। शुरुआती कारोबार में ही बाजार पूंजीकरण में करीब 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आने की बात सामने आई। इससे निवेशकों को कम समय में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का असर
बाजार में गिरावट के पीछे वैश्विक घटनाक्रम को प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर गतिरोध तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के प्रस्ताव को खारिज किए जाने की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 2 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय मानी जाती है, क्योंकि इससे आयात लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बनी दबाव की वजह
घरेलू शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर भी देखा जा रहा है। इससे पहले शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार में 3,600 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की थी। वैश्विक बाजारों से जुड़े जोखिम और विदेशी पूंजी के प्रवाह में कमजोरी का असर निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ा है।
फिलहाल बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन कारकों का बाजार की दिशा पर असर देखने को मिल सकता है।










