उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सूखाताल झील सौन्दर्यकरण से जुड़ी स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। पूर्व आदेश के अनुपालन में कुमाऊं आयुक्त और जिलास्तरीय विकास प्राधिकरण (DDMA) के सचिव अदालत के समक्ष उपस्थित हुए।
सरकार ने दी प्रगति रिपोर्ट, झील को सुरक्षा दीवार से किया गया बंद
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से प्रगति रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार—
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सूखाताल झील को सुरक्षा दीवार से बंद कर दिया गया है
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पर्यटकों की सुविधा के लिए लिफ्ट का निर्माण किया गया
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झील की वर्तमान स्थिति के फोटो भी न्यायालय में प्रस्तुत किए गए
फोटो देखने के बाद अदालत ने झील की साफ–सफाई और बेहतर रखरखाव के लिए ठोस निर्देश दिए।
कुमाऊं आयुक्त करेंगे एक बार फिर निरीक्षण
मामले की सुनवाई में अधिवक्ता डॉ. कार्तिकेय हरिगुप्त ने बताया कि कुमाऊं आयुक्त ने अदालत को आश्वस्त किया है कि वे सूखाताल झील का व्यक्तिगत रूप से दूसरा निरीक्षण करेंगे।
उन्होंने पहले भी निर्माण कार्यों की विस्तृत जांच की थी।
मुख्य न्यायाधीश जे नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने झील सुधार पर 8 दिसंबर तक सुझाव पेश करने को कहा है।
28 करोड़ की लागत से बिना अनुमति beautification, हाईकोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान
मामले के अनुसार उच्च न्यायालय ने पूर्व में सूखाताल झील से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।
लेकिन जिला विकास प्राधिकरण ने अतिक्रमण हटाने के स्थान पर 28 करोड़ रुपये की लागत से झील सौन्दर्यकरण कार्य शुरू कर दिया।
एक पत्र के आधार पर हाईकोर्ट ने पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे PIL के रूप में दर्ज किया।
जुलाई में सौन्दर्यकरण पर लगी रोक हटाई, तीन महीने में रिपोर्ट देने के निर्देश
पहले न्यायालय ने सभी निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी थी।
लेकिन जुलाई में झील विकास प्राधिकरण के अनुरोध पर अदालत ने रोक हटाते हुए निर्देश दिया था कि—
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तीन महीने के भीतर काम पूरा किया जाए
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संपूर्ण रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाए
आज वही रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की गई।










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