चंपावत में कैबिनेट और घोषणाएं हुईं, लेकिन पशुपालकों की आवाज मुख्यमंत्री तक पहुंची या नहीं? — किसान मंच
दूध का उचित खरीद मूल्य मांग रहे पशुपालकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं; जल्द चंपावत में जिम्मेदार अधिकारियों की कुर्सियों के सामने पशुपालकों के साथ आंदोलन करेगा किसान मंच — किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय
हल्द्वानी/चंपावत। किसान मंच उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने चंपावत जिले के पशुपालक किसानों को दूध का उचित खरीद मूल्य दिए जाने की मांग को लेकर सरकार और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज चंपावत जिले में पहुंचे, सरकार की कैबिनेट बैठक हुई और क्षेत्र के विकास को लेकर अनेक घोषणाएं तथा निर्णय सामने आए। विकास की घोषणाएं स्वागत योग्य हैं, लेकिन किसान मंच का सीधा सवाल है कि क्या इस दौरान मुख्यमंत्री को यह भी बताया गया कि इसी चंपावत जिले के पशुपालक किसान लंबे समय से अपने दूध का उचित खरीद मूल्य मांग रहे हैं?
उन्होंने कहा कि पशुपालक किसान सुबह से रात तक पशुओं की देखभाल करता है। चारा, भूसा, दाना, पशु आहार, दवाइयां, उपचार और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद यदि किसान को उसके दूध का ऐसा मूल्य नहीं मिलता जिससे उसकी लागत और मेहनत का सम्मान हो सके, तो पशुपालन आखिर कब तक टिकेगा?
किसान मंच मुख्यमंत्री से यह सवाल नहीं, बल्कि जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से भी जवाब चाहता है कि क्या उन्होंने मुख्यमंत्री के चंपावत दौरे और कैबिनेट बैठक के अवसर पर पशुपालकों की इस मांग को उनके सामने रखने की जिम्मेदारी निभाई? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि किसी किसान की मांग केवल इसलिए फाइलों में दबाकर नहीं रखी जा सकती कि वह सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन नहीं कर रहा। किसान मंच पहले संवाद, पत्राचार और लोकतांत्रिक माध्यमों से समाधान चाहता है, लेकिन इसे कमजोरी समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए।
चंपावत के पशुपालकों की दूध खरीद दर बढ़ाने की मांग को लेकर डेयरी विकास विभाग के निदेशक को किसान मंच की ओर से ज्ञापन भेजा जा चुका है। विभाग को पर्याप्त अवसर दिया गया है कि वह पशुपालकों की वास्तविक लागत, बढ़ते पशु आहार एवं चिकित्सा खर्च और वर्तमान खरीद दर का व्यावहारिक आकलन कर उचित निर्णय ले।
लेकिन यदि जिम्मेदार अधिकारी इस मांग को गंभीरता से नहीं लेते हैं तो किसान मंच अब चंपावत में पशुपालक किसानों के साथ आंदोलन की तैयारी करेगा।
जिस जिले में आज सरकार कैबिनेट करके गई है, आवश्यकता पड़ी तो उसी जिले में जिम्मेदार अधिकारियों की बड़ी कुर्सियों के सामने बैठकर पशुपालक अपनी बात रखेंगे। तब शायद अधिकारियों को मुख्यमंत्री और सरकार तक यह बताना पड़ेगा कि चंपावत का पशुपालक क्या मांग रहा है और उसकी मांग कितनी जरूरी है।
किसान मंच स्पष्ट करता है कि आंदोलन की स्थिति उत्पन्न होने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों की होगी। विशेष रूप से डेयरी विकास विभाग के निदेशक से अपेक्षा है कि किसान मंच द्वारा भेजे गए ज्ञापन पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए समय रहते सकारात्मक पहल की जाए।
किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा—
“हमारी मांग किसी सरकार के विरोध के लिए नहीं, बल्कि पशुपालक किसान के हक के लिए है। सरकार विकास की घोषणाएं करे, नई योजनाएं लाए, लेकिन जिस किसान के श्रम से दूध लोगों के घरों तक पहुंचता है, उसकी मेहनत का उचित मूल्य भी सुनिश्चित करे। किसान मंच किसी भी पशुपालक किसान की जायज मांग को सत्ता या अधिकारियों की अनदेखी का शिकार नहीं होने देगा।”
उन्होंने कहा कि किसान मंच जल्द ही चंपावत जिले के पशुपालकों से संवाद कर आगे की रणनीति तय करेगा। यदि दूध खरीद मूल्य पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
हम पहले संवाद चाहते हैं, समाधान चाहते हैं—लेकिन किसान की आवाज अनसुनी हुई तो संघर्ष भी होगा।












