देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के वार्षिक तबादलों की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है, लेकिन इस बार भी शिक्षा विभाग के शिक्षकों के स्थानांतरण पर अनिश्चितता बनी हुई है। सुगम और दुर्गम क्षेत्र के निर्धारण से जुड़ा मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण शिक्षकों के तबादले फिलहाल संभव नहीं दिख रहे हैं।
मानकों के अनुसार कार्यस्थलों का चिह्नीकरण जारी
तबादला एक्ट के तहत सभी विभागों को 31 मार्च तक अपने-अपने कार्यस्थलों का मानकों के अनुसार चिह्नीकरण करना होता है। इसके तहत यह तय किया जाता है कि कौन-सा क्षेत्र सुगम है और कौन-सा दुर्गम।
हालांकि अन्य विभागों में यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन राज्य के सबसे बड़े विभागों में से एक शिक्षा विभाग में यह काम प्रभावित हो सकता है।
शिक्षकों के तबादलों पर कोर्ट की रोक
शिक्षा सचिव रविनाथ रामन के अनुसार, सुगम-दुर्गम क्षेत्र निर्धारण से संबंधित मामला न्यायालय में लंबित है, जिसके चलते शिक्षकों के तबादलों पर रोक लगी हुई है। जब तक इस मामले का निपटारा नहीं होता, तब तक सामान्य तबादला प्रक्रिया लागू नहीं हो पाएगी।
सीमित संख्या में प्रस्ताव भेजे गए
हालांकि, विशेष परिस्थितियों में धारा 27 के तहत बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के करीब 250 शिक्षकों के तबादलों का प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेजा गया है। इस पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।
समय-सारणी के अनुसार चल रही प्रक्रिया
कार्मिक सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि तबादला एक्ट के तहत हर साल तय समय-सारणी के अनुसार प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। विभागों को अलग से शासनादेश का इंतजार किए बिना निर्धारित समय-सीमा का पालन करना होगा।
नियमों के अनुसार:
- 1 अप्रैल तक मंडल एवं जिला स्तर पर स्थानांतरण समितियों का गठन
- 15 अप्रैल तक खाली पदों और पात्र कर्मचारियों की सूची वेबसाइट पर जारी
सुगम-दुर्गम विवाद बना बड़ी बाधा
शिक्षा विभाग में सुगम और दुर्गम क्षेत्र के वर्गीकरण को लेकर विवाद लगातार बना हुआ है। कंचन देवराड़ी के अनुसार, उत्तरकाशी जिले में एक ही क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दो विद्यालयों को अलग-अलग श्रेणी (जूनियर हाईस्कूल को दुर्गम और प्राथमिक विद्यालय को सुगम) में रखा गया है।
इस विसंगति को लेकर मामला न्यायालय पहुंचा, जिसके बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल सुगम-दुर्गम आधार पर तबादलों पर रोक लगा दी है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
कुल मिलाकर, प्रदेश में तबादला प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन शिक्षा विभाग में कानूनी अड़चन के चलते शिक्षकों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। जब तक न्यायालय से स्पष्ट निर्देश नहीं मिलते, तब तक बड़े स्तर पर तबादले होना मुश्किल है।













