देहरादून | Uttarakhand में श्रमिकों के हित में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। श्रम विभाग ने “मजदूरी संहिता नियमावली 2026” का मसौदा जारी कर दिया है, जिसमें काम के घंटों, ओवरटाइम और न्यूनतम मजदूरी तय करने के मानकों में व्यापक सुधार सुझाए गए हैं। इस मसौदे पर आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे गए हैं।
अब 10 घंटे से ज्यादा काम नहीं
नए प्रस्ताव के अनुसार:
- किसी भी श्रमिक से एक दिन में अधिकतम 10 घंटे ही काम कराया जा सकेगा
- सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम अनिवार्य नहीं होगा
- लगातार 6 घंटे काम के बाद कम से कम 30 मिनट का ब्रेक देना जरूरी होगा
यह कदम श्रमिकों के स्वास्थ्य और कार्य-जीवन संतुलन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
ओवरटाइम पर मिलेगा दोगुना वेतन
अगर कोई श्रमिक तय समय से अधिक काम करता है, तो:
- उसे सामान्य मजदूरी का दोगुना (Double Rate) भुगतान करना अनिवार्य होगा
यह नियम निजी और अन्य संस्थानों में श्रमिकों के शोषण को रोकने में मदद करेगा।
न्यूनतम मजदूरी का वैज्ञानिक फार्मूला
पहली बार न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए वैज्ञानिक आधार अपनाया गया है। इसमें शामिल होंगे:
- प्रति व्यक्ति 2700 कैलोरी प्रतिदिन का पोषण खर्च
- प्रति परिवार 66 मीटर वार्षिक कपड़ा
- भोजन और कपड़ों के खर्च का 10% आवास किराया
- कुल मजदूरी का 25% हिस्सा बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन पर
इससे श्रमिकों को सिर्फ जीविका ही नहीं, बल्कि बेहतर जीवन स्तर भी सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।
परिवार की परिभाषा हुई विस्तृत
नई नियमावली में परिवार की परिभाषा को भी स्पष्ट और विस्तृत किया गया है:
- पति-पत्नी
- 21 वर्ष तक के आश्रित बेटे
- अविवाहित बेटियां
- दिव्यांग संतान
- आश्रित माता-पिता
- महिला श्रमिक के मामले में सास-ससुर भी शामिल
इस बदलाव से सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचेगा।
अब ‘अत्यधिक कुशल’ श्रमिक की नई श्रेणी
अब तक श्रमिकों को तीन श्रेणियों में बांटा जाता था:
- अकुशल
- अर्द्धकुशल
- कुशल
अब एक नई श्रेणी “अत्यधिक कुशल (Highly Skilled)” जोड़ी गई है।
इसमें वे श्रमिक शामिल होंगे जिनके पास:
- उच्च स्तर की विशेषज्ञता
- निर्णय लेने की क्षमता
- तकनीकी दक्षता
ऐसे श्रमिकों को अधिक वेतन और अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है।
जनता से मांगे गए सुझाव
श्रम विभाग ने इस मसौदे पर आम लोगों, संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं।
कोई भी व्यक्ति अधिसूचना जारी होने के 30 दिनों के भीतर अपने सुझाव:
- श्रम विभाग के सचिव
- या श्रम आयुक्त
को ईमेल के माध्यम से भेज सकता है।
Uttarakhand सरकार का यह कदम श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। काम के घंटे सीमित करना, ओवरटाइम का उचित भुगतान और न्यूनतम मजदूरी में शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे खर्च जोड़ना—ये सभी बदलाव श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।













