देहरादून। उत्तराखंड कृषि विभाग में 250 ड्रोन खरीद के कथित अनुबंध को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक निजी कंपनी द्वारा कृषि विभाग के साथ ड्रोन आपूर्ति का अनुबंध होने का दावा किए जाने के बाद मामला अब शासन और जांच एजेंसियों तक पहुंच चुका है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह मामला करीब एक वर्ष से विभाग, सचिवालय और जांच एजेंसियों के संज्ञान में है तो अब तक इसकी सच्चाई सामने क्यों नहीं आ सकी।
250 ड्रोन खरीद के दावे से मचा हड़कंप
नोएडा स्थित गरुड़ा यूएवी सॉफ्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (Garuda UAV Soft Solutions Pvt. Ltd.) ने दावा किया है कि कृषि विभाग के साथ 250 कृषि ड्रोन की आपूर्ति का अनुबंध किया गया था। कंपनी ने कृषि मंत्री गणेश जोशी को भेजी शिकायत में कहा है कि यह अनुबंध तत्कालीन कृषि निदेशक के कार्यकाल के दौरान हुआ था।
कंपनी के इस दावे के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया और मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की गई।
कृषि विभाग का दावा—न अनुबंध, न फाइल, न भुगतान
कृषि विभाग की प्रारंभिक जांच में कंपनी के दावों की पुष्टि नहीं हो सकी। विभाग के अनुसार—
- ड्रोन खरीद का कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया।
- किसी प्रकार का अनुबंध रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।
- संबंधित फाइल भी विभागीय अभिलेखों में नहीं मिली।
- ड्रोन खरीद के लिए कोई भुगतान जारी नहीं किया गया।
यानी विभागीय रिकॉर्ड में ऐसी किसी खरीद प्रक्रिया का कोई आधिकारिक प्रमाण मौजूद नहीं है।
चार किसानों को ड्रोन मिलने की चर्चा ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि चार किसानों को ड्रोन उपलब्ध कराए भी जा चुके हैं।
बताया जा रहा है कि इन किसानों ने कंपनी के खाते में नकद भुगतान किया था। यदि यह दावा सही है तो नकद लेनदेन के कारण लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन करना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकता है।
डेढ़ करोड़ रुपये के कथित कमीशन का भी एंगल
कृषि विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि संभव है कुछ बिचौलियों ने कंपनी को यह विश्वास दिलाया हो कि विभाग 250 ड्रोन खरीदने जा रहा है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि लगभग 1.5 करोड़ रुपये के कथित कमीशन के लालच में पूरी कहानी तैयार की गई हो।
हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह पहलू जांच का विषय है।
एक ड्रोन की कीमत 10 लाख रुपये, सब्सिडी में मिलता है 2.5 लाख में
कृषि विभाग की यंत्रीकरण योजना के तहत किसानों को कृषि ड्रोन पर सब्सिडी दी जाती है।
- बाजार में एक ड्रोन की कीमत लगभग 10 लाख रुपये बताई जाती है।
- सरकारी सब्सिडी के बाद किसान को यह करीब 2.5 लाख रुपये में उपलब्ध कराया जाता है।
इसी वजह से 250 ड्रोन की संभावित खरीद करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन से जुड़ा मामला माना जा रहा है।
शिकायत के बाद जूनियर क्लर्क निलंबित
कंपनी की शिकायत में तत्कालीन कृषि निदेशक केसी पाठक और जूनियर क्लर्क सुमित सिंह का नाम लिया गया था।
इसके बाद विभाग ने सुमित सिंह को निलंबित कर दिया, जबकि पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। कृषि निदेशक दिनेश कुमार ने शासन से स्वतंत्र जांच अधिकारी नियुक्त करने का अनुरोध किया है।
एक साल बाद भी जवाब नहीं, उठ रहे हैं बड़े सवाल
पूरे मामले में कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अभी तक नहीं मिल सके हैं—
- जब खरीद का प्रस्ताव ही नहीं था तो कथित अनुबंध कैसे हुआ?
- यदि कंपनी का दावा सही है तो विभागीय रिकॉर्ड कहां गायब हो गया?
- यदि विभाग सही है तो कंपनी ने अनुबंध का दावा किस आधार पर किया?
- चार किसानों को ड्रोन कैसे मिले?
- नकद भुगतान किसने लिया और किस आधार पर लिया?
- जब मामला एक वर्ष से जांच एजेंसियों और शासन के संज्ञान में है तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?
अब शासन स्तर की जांच पर टिकी निगाहें
कृषि विभाग ने शासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। जांच अधिकारी नियुक्त होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कंपनी का दावा सही है या विभागीय रिकॉर्ड, और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।












