US Diesel Price Hike: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट का असर अब अमेरिकी ईंधन बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। बढ़ती ईंधन लागत से ट्रकिंग, कृषि, माल ढुलाई और अन्य कारोबारों पर दबाव बढ़ने के साथ महंगाई का जोखिम भी गहराता जा रहा है।
अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के आंकड़ों के मुताबिक, 19 सितंबर को अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत 6.4866 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई। इससे एक सप्ताह पहले यह कीमत करीब 6.16 डॉलर प्रति गैलन थी। यानी महज एक सप्ताह में डीजल के दाम में लगभग 33 सेंट यानी 5.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
एक साल में करीब 75 फीसदी महंगा हुआ डीजल
अमेरिका में डीजल की कीमतों में हुई हालिया तेजी को एक साल के आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। AAA के अनुसार, करीब एक साल पहले राष्ट्रीय औसत कीमत लगभग 3.71 डॉलर प्रति गैलन थी। इसके मुकाबले 19 सितंबर की कीमत लगभग 75 फीसदी अधिक है।
वहीं, 27 फरवरी को डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत करीब 3.75 डॉलर प्रति गैलन थी। इसके बाद कीमत लगातार बढ़ती गई और 19 सितंबर को करीब 6.49 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
इस तेजी का असर खासतौर पर उन क्षेत्रों पर पड़ रहा है, जहां डीजल पर परिवहन और कारोबार की निर्भरता ज्यादा है।
कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा महंगा डीजल
अमेरिका में कैलिफोर्निया डीजल की ऊंची कीमतों वाले प्रमुख बाजारों में शामिल है। AAA के अनुसार, राज्य में डीजल की औसत कीमत करीब 8.4161 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। यह राष्ट्रीय औसत की तुलना में लगभग 2 डॉलर प्रति गैलन अधिक है।
ईंधन की इस बढ़ती लागत का सीधा असर ट्रक चालकों, परिवहन कंपनियों, किसानों और दूसरे व्यवसायों की परिचालन लागत पर पड़ सकता है।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई ग्लोबल सप्लाई की चिंता
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक बना हुआ है। इस समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा रहता है।
क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने के साथ खाड़ी देशों से होने वाले तेल निर्यात और रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी दबाव की खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा रूसी रिफाइनरियों पर हमलों और मध्य पूर्व में ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान ने वैश्विक ईंधन बाजार की चिंताओं को और बढ़ाया है।
अमेरिका खुद भी बन रहा है दबाव का केंद्र
वैश्विक तेल संकट के बीच अमेरिका उन बाजारों को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जहां ईंधन की कमी महसूस हो रही है। हालांकि, इससे अमेरिकी घरेलू डीजल भंडार और सप्लाई पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ने की चिंता जताई जा रही है।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के मुताबिक, डीजल की कीमत केवल कच्चे तेल की कीमत पर निर्भर नहीं करती। इसमें रिफाइनिंग मार्जिन, वितरण लागत, टैक्स और क्रूड ऑयल तथा थोक डीजल की कीमतों के बीच का अंतर यानी क्रैक स्प्रेड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वैश्विक स्तर पर डिस्टिलेट ईंधनों की सीमित उपलब्धता और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने ईंधन लागत के साथ-साथ रिफाइनिंग मार्जिन पर भी दबाव बढ़ाया है।
डीजल महंगा हुआ तो बढ़ सकती है महंगाई
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चलाने की लागत तक सीमित नहीं रहता। अमेरिका में भारी ट्रक, मालगाड़ियां, कृषि मशीनरी और मछली पकड़ने वाली नौकाओं समेत परिवहन और उत्पादन के कई क्षेत्र डीजल पर निर्भर हैं।
ऐसे में डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत, कृषि खर्च, खाद्य पदार्थों की कीमत और औद्योगिक लागत बढ़ सकती है। अंततः इसका बोझ उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
यही वजह है कि ईंधन की रिकॉर्ड कीमतों के बीच अमेरिका में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। ईरान और मध्य पूर्व का संकट यदि लंबे समय तक जारी रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर आगे भी देखने को मिल सकता है।
नोट: ईंधन कीमतों के आंकड़े AAA के उपलब्ध राष्ट्रीय औसत डेटा और संबंधित अमेरिकी ऊर्जा बाजार की रिपोर्टिंग पर आधारित हैं।












