Amroha News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले क्रिकेटर मोहम्मद शमी की राष्ट्रीय लोक दल (RLD) अध्यक्ष जयंत चौधरी से मुलाकात के बाद सियासी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। दिल्ली में हुई इस मुलाकात की तस्वीर जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया पर साझा की, जिसके बाद शमी के राजनीति में कदम रखने को लेकर कयास लगाए जाने लगे हैं।
चर्चा है कि मोहम्मद शमी आगामी विधानसभा चुनाव में अमरोहा से चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं, कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि शमी अपने भाई मोहम्मद हसीब को अमरोहा सदर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारने की इच्छा रखते हैं। हालांकि, शमी, जयंत चौधरी या आरएलडी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
मोहम्मद शमी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के रहने वाले हैं। ऐसे में अपने गृह क्षेत्र से संभावित राजनीतिक शुरुआत की चर्चा ने स्थानीय राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। जयंत चौधरी से उनकी मुलाकात को इसी संभावित राजनीतिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
शमी खुद लड़ेंगे या भाई को दिलाएंगे टिकट?
राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, आरएलडी में मोहम्मद शमी और उनके परिवार की संभावित राजनीतिक भूमिका को लेकर बातचीत हुई है। एक संभावना यह बताई जा रही है कि शमी खुद अमरोहा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, जबकि दूसरी चर्चा उनके बड़े भाई मोहम्मद हसीब को चुनाव मैदान में उतारने की है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर शमी की कोई औपचारिक राजनीतिक योजना तय हुई है या नहीं। इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक गतिविधि और कयास के तौर पर ही देखा जा रहा है।
अमरोहा सीट पर क्यों टिकी नजर?
अमरोहा विधानसभा सीट लंबे समय से समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाली सीटों में गिनी जाती है। वर्तमान विधायक महबूब अली लंबे समय से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की थी।
ऐसे में अगर आरएलडी इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतारती है तो उम्मीदवार का स्थानीय प्रभाव और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण होंगे। मोहम्मद शमी की स्थानीय पहचान और क्रिकेट की लोकप्रियता को संभावित राजनीतिक समीकरण के संदर्भ में चर्चा का विषय बनाया जा रहा है।
अमरोहा में क्या है चुनावी समीकरण?
अमरोहा विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा क्षेत्र में विभिन्न जातीय और सामाजिक समूह भी चुनावी समीकरण को प्रभावित करते हैं। मोहम्मद शमी के तुर्क समुदाय से होने की वजह से भी उनकी संभावित राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा हो रही है।
पिछले चुनावों में अमरोहा सीट पर समाजवादी पार्टी के महबूब अली का प्रभाव देखने को मिला है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले अगर आरएलडी इस सीट पर नया चेहरा उतारती है तो मुकाबले का समीकरण बदल सकता है।
क्रिकेट के बाद राजनीति की पिच पर शमी?
मोहम्मद शमी भारतीय क्रिकेट का चर्चित नाम हैं और अमरोहा से उनका जुड़ाव भी पुराना है। अब जयंत चौधरी के साथ उनकी मुलाकात के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह क्रिकेट के बाद राजनीति की पिच पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं?
फिलहाल इसका जवाब सामने नहीं आया है। शमी खुद चुनाव लड़ेंगे, अपने भाई को चुनाव मैदान में उतारेंगे या फिर यह मुलाकात सिर्फ एक राजनीतिक शिष्टाचार मुलाकात थी—इस पर स्थिति किसी आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।
फिलहाल मोहम्मद शमी और जयंत चौधरी की मुलाकात ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अमरोहा की सियासत में चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।












