देहरादून: उत्तराखंड की युवा महिला क्रिकेटर नीलम भारद्वाज ने संघर्ष, मेहनत और प्रतिभा के दम पर क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। रामनगर की तंग गलियों से क्रिकेट का सफर शुरू करने वाली नीलम ने पहले सीनियर महिला वनडे क्रिकेट में ऐतिहासिक दोहरा शतक जड़ा और अब उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) 2026 में देहरादून वॉरियर्स को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
नीलम की क्रिकेट यात्रा आसान नहीं रही। आर्थिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बीच उनके मजदूर पिता ने बेटी के क्रिकेट के सपने को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग किया। महज आठ साल की उम्र में लकड़ी का बल्ला थामने वाली नीलम की प्रतिभा को उनके कोच मोहम्मद इसरार अंसारी ने पहचाना। कोच ने उन्हें क्रिकेट की तकनीकी बारीकियां सिखाने के साथ मुश्किल दौर में लगातार प्रोत्साहित किया।

कोरोना महामारी के दौरान जब खेल गतिविधियां लगभग पूरी तरह ठप थीं, तब भी नीलम की ट्रेनिंग जारी रही। विशेष अनुमति और लड़कों की अकादमियों के बीच अभ्यास करते हुए उन्होंने कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा का परिचय देना शुरू कर दिया। इसका परिणाम यह रहा कि महज 12 साल की उम्र में नीलम ने उत्तराखंड की अंडर-19 टीम में जगह बना ली।
2024 में दोहरे शतक से रचा इतिहास
नीलम भारद्वाज का नाम राष्ट्रीय स्तर पर तब तेजी से चर्चा में आया, जब दिसंबर 2024 में सीनियर विमेंस वनडे ट्रॉफी में उन्होंने नागालैंड के खिलाफ नाबाद 202 रन की ऐतिहासिक पारी खेली।
उन्होंने यह दोहरा शतक महज 137 गेंदों में पूरा किया, जिसमें 27 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। इस पारी के साथ नीलम ने महिला लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे कम उम्र में दोहरा शतक लगाने वाली भारतीय महिला क्रिकेटरों में अपना नाम दर्ज कराया।
इस ऐतिहासिक पारी के दौरान 150 रन के बाद नीलम काफी थक चुकी थीं, लेकिन टीम के सहयोग और कोचिंग स्टाफ के प्रोत्साहन ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। मैदान पर साथी खिलाड़ी कंचन परियार के सहयोग ने भी उनकी पारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
UPL ने दिया बड़ा मंच, देहरादून वॉरियर्स बनी चैंपियन
उत्तराखंड में महिला क्रिकेट को नया मंच देने में उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। राज्य के छोटे शहरों और पहाड़ी क्षेत्रों से निकलने वाली महिला खिलाड़ियों को इस तरह के मंच से अपनी प्रतिभा बड़े स्तर पर दिखाने का अवसर मिल रहा है।
UPL 2026 में नीलम भारद्वाज ने अपनी बल्लेबाजी के साथ ऑलराउंड प्रदर्शन से देहरादून वॉरियर्स के अभियान को मजबूती दी। टूर्नामेंट में उन्होंने बागेश्वर एरियल के खिलाफ 39 गेंदों में नाबाद 48 रन और मसूरी थंडर्स के खिलाफ 46 गेंदों में 48 रन की उपयोगी पारियां खेलीं।
फाइनल मुकाबले में भी नीलम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रदर्शन और संयम के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। टीम की खिताबी जीत के साथ नीलम की उपलब्धियों में UPL 2026 की चैंपियन ट्रॉफी भी जुड़ गई।
दोहरे शतक के बाद भी जमीन से जुड़ी नीलम
कम उम्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद नीलम भारद्वाज अपने पैर जमीन पर रखकर आगे बढ़ रही हैं। 2024 में दोहरा शतक लगाने के बाद जब सोशल मीडिया पर उनके नाम की चर्चा तेज हुई, तब भी उन्होंने अपना ध्यान प्रसिद्धि के बजाय परिवार और करीबी लोगों पर रखा। उन्होंने सबसे पहले अपनी मां और अपनी खास दोस्त नंदिनी से बात की।
नीलम क्रिकेट में महेंद्र सिंह धोनी के धैर्य, केएल राहुल के टेम्परामेंट और राधा यादव के मैदान पर आक्रामक रवैये से प्रभावित हैं।
अब उनका लक्ष्य सिर्फ घरेलू क्रिकेट तक सीमित नहीं है। नीलम अंडर-19 विश्व कप और भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाने का सपना देख रही हैं। उनकी कोच अनघा देशपांडे की सीख भी उनके लक्ष्य को स्पष्ट करती है—भारत की जर्सी हासिल करना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन लंबे समय तक उस स्तर पर बने रहना उससे भी बड़ी चुनौती है।
रामनगर की गलियों से शुरू हुआ नीलम भारद्वाज का सफर अब UPL की चैंपियन ट्रॉफी तक पहुंच चुका है। दोहरे शतक से अपनी पहचान बनाने के बाद उन्होंने एक बार फिर साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रतिभा और मेहनत के दम पर बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है। अब नजरें उनके अगले कदम और भारतीय क्रिकेट में उनकी संभावित दस्तक पर हैं।












