RBI Repo Rate Hike: भारतीय रिजर्व बैंक दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला ले सकता है। SBI Research के अनुमान के मुताबिक, महंगाई और रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच RBI रेपो रेट में 0.50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो रेपो रेट 6 प्रतिशत तक पहुंच सकता है और इसका सीधा असर होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन और दूसरी EMI पर पड़ने की आशंका है।
भारतीय रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति बैठक पर बाजार के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर है। ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिन्होंने फ्लोटिंग रेट पर लोन लिया हुआ है। वहीं, नया लोन लेने की तैयारी कर रहे ग्राहकों के लिए भी ब्याज दरें चिंता बढ़ा सकती हैं।
महंगाई बढ़ी तो RBI ले सकता है सख्त फैसला
SBI Research की रिपोर्ट में महंगाई और विदेशी पूंजी के दबाव को मौद्रिक नीति के लिए अहम चुनौती बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर महंगाई का दबाव आगे भी बना रहता है तो RBI दिसंबर में ब्याज दरों को और बढ़ाने का रास्ता अपना सकता है।
रिपोर्ट में नवंबर के दौरान महंगाई के ऊंचे स्तर पर पहुंचने की संभावना जताई गई है। ऐसे हालात में केंद्रीय बैंक का मुख्य लक्ष्य महंगाई को नियंत्रित करना और अर्थव्यवस्था में कीमतों के दबाव को कम करना हो सकता है।
हालांकि, दिसंबर में रेपो रेट बढ़ेगा ही, ऐसा अभी तय नहीं है। अंतिम फैसला उस समय की महंगाई दर, आर्थिक गतिविधियों, रुपये की स्थिति और वैश्विक बाजारों के हालात को देखते हुए लिया जाएगा।
रेपो रेट बढ़ने पर आपकी EMI पर क्या असर होगा?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्प अवधि के लिए पैसा उपलब्ध कराता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर कर्ज की ब्याज दरों पर दिखाई दे सकता है।
अगर बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं तो होम लोन की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है। इसी तरह पर्सनल लोन और कार लोन लेने वालों पर भी अतिरिक्त ब्याज का बोझ पड़ सकता है।
खास तौर पर फ्लोटिंग ब्याज दर वाले लोन ग्राहकों को अपनी EMI और बकाया लोन अवधि पर नजर रखनी चाहिए। हालांकि वास्तविक असर बैंक की ब्याज दर, लोन के प्रकार, ग्राहक की प्रोफाइल और लागू रीसेट नियमों पर निर्भर करेगा।
रुपये पर दबाव भी RBI के लिए बड़ी चुनौती
भारतीय रुपये पर भी दबाव बना हुआ है। डॉलर में मजबूती और विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार से पूंजी निकाले जाने के कारण रुपये की स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
SBI Research के मुताबिक, सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय डेट मार्केट से करीब 2.1 अरब डॉलर की रकम बाहर निकाली। ऐसे में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बनाए रखना और रुपये में अत्यधिक कमजोरी को रोकना भी नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
रिपोर्ट में विदेशी निवेश को लंबे समय तक आकर्षित रखने के लिए टैक्स व्यवस्था में बदलाव समेत कुछ उपायों का सुझाव भी दिया गया है।
विदेशी निवेश और रुपये को लेकर SBI Research के सुझाव
रुपये और भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी के दबाव को कम करने के लिए SBI Research ने कई सुझाव दिए हैं। इनमें लंबे समय के विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स ढांचे में बदलाव, निर्यात से होने वाली विदेशी कमाई को भारत वापस लाने की समयसीमा कम करना और बाजार में नकदी के प्रबंधन के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशंस का इस्तेमाल जैसे उपाय शामिल हैं।
इन सुझावों का उद्देश्य भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी को बनाए रखना और रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है।
GDP ग्रोथ के अनुमान से मिली राहत
ब्याज दर और महंगाई से जुड़ी चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP growth का अनुमान 7.1 प्रतिशत रखा है। वहीं, सालाना महंगाई दर का अनुमान 5.2 प्रतिशत बताया गया है।
अब दिसंबर में होने वाली RBI की मौद्रिक नीति बैठक महत्वपूर्ण हो गई है। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ सकता है। वहीं, महंगाई में नरमी आती है तो RBI दरों को स्थिर रखने का विकल्प भी चुन सकता है।
यानी फिलहाल लोन लेने वालों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिसंबर में RBI का फैसला किस दिशा में जाता है। रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है तो इसका असर बैंकिंग ब्याज दरों और आगे चलकर EMI पर पड़ सकता है।














