देहरादून। सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, देहरादून में तीन दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘धरोहर-2026’ का सोमवार, 2 नवंबर को भव्य शुभारंभ हुआ। इस वर्ष महोत्सव की थीम ‘नवरंग’ रखी गई है। इसके तहत तीन दिनों तक संगीत, नृत्य, कला, संस्कृति और मनोरंजन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव में छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
‘धरोहर-2026’ में संस्थान के विद्यार्थियों की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक और आमंत्रित कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इसके साथ ही फ्रेशर और फेयरवेल समारोह का आयोजन भी किया जाएगा। फ्रेशर समारोह में नए विद्यार्थियों का स्वागत होगा, जबकि अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं को विदाई दी जाएगी।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर संस्थान के चेयरमैन एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘धरोहर’ केवल एक सांस्कृतिक महोत्सव नहीं, बल्कि संस्थान की पहचान, परंपरा और विद्यार्थियों की प्रतिभाओं का उत्सव है। यह मंच हर वर्ष छात्र-छात्राओं को अपनी छिपी प्रतिभा पहचानने, उसे निखारने और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने का अवसर देता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से संस्थान की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने और अपनी प्रतिभा को खुलकर प्रदर्शित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संस्थान और उसकी धरोहर विद्यार्थियों की भी है। इसे संजोकर रखना और नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों को नए प्रयोग करने चाहिए और अपनी क्षमताओं को सामने लाने से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
ललित मोहन जोशी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना और रोजगार प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास भी बेहद जरूरी है। शैक्षणिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, टीम भावना, आपसी सहयोग और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास है कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी प्रतिभा पहचानने और भविष्य की चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करने का पर्याप्त अवसर मिले।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक रमेश चंद्र जोशी, प्रबंध निदेशक संजय जोशी, अकादमिक निदेशक सपना जोशी, प्रधानाचार्या, रजिस्ट्रार, शिक्षकगण और कर्मचारी सहित 2,000 से अधिक छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।












