परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास तक निकाला मार्च
2 नवंबर को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां अपनी विभिन्न मांगों को लेकर परेड ग्राउंड में एकत्रित हुईं। यहां से उन्होंने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया। हालांकि, हाथीबड़कला पहुंचने पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
मुख्यमंत्री आवास कूच रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सड़क पर बैठकर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग
आंगनबाड़ी कार्यकत्री संयुक्त संगठन की प्रदेश महामंत्री सुशीला खत्री ने कहा कि कार्यकत्रियां लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें ठोस निर्णय के बजाय आश्वासन ही मिलते रहे हैं।
उन्होंने उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 12 हजार रुपये किए जाने के फैसले का हवाला देते हुए उत्तराखंड सरकार से भी जल्द मानदेय वृद्धि की मांग की। उनका कहना है कि प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को भी उनके काम के अनुरूप मानदेय मिलना चाहिए।
2024 में बनी कमेटी, अब तक फैसले का इंतजार
संगठन की ओर से बताया गया कि वर्ष 2024 में मानदेय वृद्धि के मुद्दे पर सरकार ने एक कमेटी गठित की थी। हालांकि, लंबे समय बीतने के बावजूद कमेटी की रिपोर्ट और उस पर लिए गए निर्णय की जानकारी कार्यकत्रियों को नहीं दी गई है।
संगठन का आरोप है कि अपनी मांगों को लेकर कई बार आंदोलन किए जाने के बाद भी उन्हें केवल आश्वासन मिले हैं। इसी के चलते प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को एक बार फिर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ा।
दिवाली से पहले मांगें पूरी करने की चेतावनी
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दिवाली से पहले मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां दिवाली का त्योहार काला दिवस के रूप में मनाएंगी।
अब देखना होगा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के प्रदर्शन और चेतावनी के बाद सरकार उनकी लंबित मांगों पर क्या कदम उठाती है।












