घटना 31 अक्टूबर की सुबह की बताई जा रही है। आरोप है कि कुलपति कार्यालय के बाहर कर्मचारियों और अन्य लोगों ने कुलसचिव के साथ मारपीट की। हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं और वह बेहोश हो गए। मामले में कुलसचिव की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है।
कुलपति कार्यालय के बाहर शुरू हुआ विवाद, कुलसचिव से मारपीट
पुलिस के अनुसार, कुलसचिव सत्यदेव निगमालंकार ने अपनी शिकायत में बताया कि कुछ कर्मचारी जबरन कुलपति कार्यालय में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। इसकी जानकारी मिलने पर वह मौके पर पहुंचे। उस समय कार्यालय के बाहर कई कर्मचारी और अन्य लोग मौजूद थे।
कुलसचिव ने कर्मचारियों से अपने-अपने कार्यस्थलों पर जाने और विश्वविद्यालय परिसर में अराजक माहौल नहीं बनाने की अपील की। आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और रजनीश भारद्वाज, नरेंद्र मलिक, अरुण पाल, ओमबीर सिंह, उमाशंकर और सत्यदेव समेत अन्य लोगों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।
शिकायत के मुताबिक, हमलावरों ने कुलसचिव को लात-घूंसों और थप्पड़ों से पीटा। इस दौरान हाथ में पहने कड़े से भी हमला करने का आरोप है। मारपीट में गंभीर चोटें लगने के कारण कुलसचिव बेहोश हो गए।
बैग में रखे चेक और जरूरी दस्तावेज छीनने का आरोप
कुलसचिव ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उनका बैग भी छीन लिया गया। बैग में विश्वविद्यालय से संबंधित कुछ चेक और महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे हुए थे।
इसके अलावा आरोप है कि हमलावर जबरन कुलपति कार्यालय में घुस गए और वहां लगे सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। कार्यालय में लगी डीवीआर उखाड़ने और कुछ गोपनीय फाइलें अपने साथ ले जाने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायत के अनुसार, कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों को जबरन बाहर निकाला गया और कुलपति के कक्ष में प्रवेश करने का प्रयास किया गया। विरोध करने पर कुलसचिव, कुलपति और अन्य कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की गई तथा जान से मारने की धमकी भी दी गई।
तीन विश्वविद्यालय कर्मचारी गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा जेल
कनखल कोतवाली प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह रावत के अनुसार, कुलसचिव की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में नरेंद्र मलिक, ओमबीर सिंह और उमाशंकर शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, तीनों विश्वविद्यालय के कर्मचारी हैं और विश्वविद्यालय परिसर में ही रहते हैं। गिरफ्तारी के बाद तीनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
15 दिनों से चल रहा था कर्मचारियों का आंदोलन
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में कर्मचारियों का विवाद पिछले कई दिनों से चल रहा था। सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। इसके बाद शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ से जुड़े कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हो गए थे।
करीब 15 दिनों से चल रहा यह आंदोलन शुक्रवार रात आपसी समझौते के बाद समाप्त हुआ था। हालांकि, शनिवार सुबह एक बार फिर कर्मचारियों और कुलसचिव के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद ने हंगामे और मारपीट का रूप ले लिया।
कुलपति ने CCTV फुटेज की जांच कराने की कही थी बात
घटना के बाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा था कि कुछ कर्मचारियों ने कुलसचिव के साथ मारपीट की है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं थीं।
कुलपति ने विश्वविद्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की बात भी कही थी।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। शिकायत में लगाए गए आरोपों, कथित तौर पर गायब हुए दस्तावेजों और सीसीटीवी कैमरों को नुकसान पहुंचाने के मामले में आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।













