मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने एसटीएफ के अधीन विशेष अन्वेषण दल (SIT) का गठन किया था। आईजी नीलेश आनंद भरणे और एसएसपी एसटीएफ के निर्देशन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दर्ज मुकदमों को एक साथ जोड़कर जांच की जा रही है।
2022 से निवेश नेटवर्क से जुड़ा था आरोपी नवीन
एसटीएफ की जांच के अनुसार, गिरफ्तार नवीन सिंह नेगी वर्ष 2022 से एक कंपनी से जुड़ा हुआ था। बाद में वह लविश चौधरी की ओर से संचालित कंपनियों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करने लगा। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) में पंजीकृत नहीं थीं।
आरोप है कि कंपनी बंद होने और उसके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज होने के बावजूद नवीन ने नई कंपनी का प्रचार शुरू कर दिया था। इसके लिए जूम मीटिंग के माध्यम से लोगों को दोबारा ऑनलाइन बिजनेस से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा था। इसी आधार पर देहरादून साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज किया गया।
रेफरल नेटवर्क से हजारों लोगों को जोड़ने का आरोप
मामले में गिरफ्तार दूसरी आरोपी कविता परमार भी वर्ष 2022 से कंपनी से जुड़ी हुई थी। पूछताछ में सामने आया कि उसने खुद के साथ ही अपने परिजनों की आईडी बनाकर निवेश किया था। इसके अलावा रेफरल आईडी के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को नेटवर्क से जोड़ा गया।
एसटीएफ के मुताबिक, कविता की रोबो आईडी से करीब 10 से 15 हजार लोग जुड़े हुए थे। वह कंपनी में सीनियर ईगल एग्जीक्यूटिव के पद तक पहुंच गई थी। आरोप है कि उसे कंपनी से हर महीने करीब 1,000 डॉलर का लाभ मिलता था।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच वह कंपनी के सेमिनार में शामिल होने के लिए मलेशिया, थाईलैंड, दुबई और वियतनाम की करीब 12 से 13 बार यात्रा कर चुकी थी। इन यात्राओं के दौरान आने-जाने, ठहरने और खाने का खर्च कथित तौर पर कंपनी की ओर से उठाया जाता था।
जूम मीटिंग में एक साथ जुड़ते थे करीब एक हजार लोग
एसटीएफ के अनुसार, कविता देहरादून सहित उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में कंपनी का प्रचार कर रही थी। इसके लिए जूम मीटिंग और व्हाट्सएप ग्रुप का सहारा लिया जाता था। ऑनलाइन बैठकों में एक समय पर करीब एक हजार लोग तक जुड़ते थे और उन्हें निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाता था।
पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि निवेशकों द्वारा कंपनी के बैंक खातों में जमा कराई गई रकम के बदले उनके ऑनलाइन खातों में डॉलर के रूप में आंकड़े दिखाए जाते थे। आरोपी के अनुसार, ये आंकड़े वास्तविक धनराशि नहीं थे।
दो मोबाइल फोन बरामद, विदेश तक जुड़े नेटवर्क की जांच तेज
एसटीएफ ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइल फोन में ऑनलाइन लेन-देन, बैंकिंग विवरण, व्हाट्सएप चैट, ट्रेडिंग खातों और क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की संभावना है।
फिलहाल जांच एजेंसी निवेशकों से जुटाई गई रकम के वास्तविक स्रोत और उसके इस्तेमाल का पता लगा रही है। इसके साथ ही बैंक खातों, नकद लेन-देन, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए हुए ट्रांजेक्शन और विदेश में मौजूद मुख्य आरोपी लविश चौधरी सहित अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
एसटीएफ की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा विदेश में बैठे कथित मुख्य संचालक और निवेश नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंच गया है।













