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अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी जुर्माने का भुगतान नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। खास बात यह है कि अदालत ने आरोपी को 18 दिनों के भीतर POCSO के दूसरे मामले में भी दंडित किया है।
2019 से 2021 के बीच हुआ अपराध
मामले के अनुसार यह घटना वर्ष 2019 से 2021 के बीच की है। पीड़िता की मां, जो Meghalaya की रहने वाली हैं, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 13 वर्षीय बेटी देहरादून के Nehru Colony क्षेत्र स्थित एक स्कूल में पढ़ती थी।
स्कूल का संचालन आरोपी शिक्षक करता था, जहां एक महिला कर्मचारी भी कार्यरत थी। संस्थान में हॉस्टल की सुविधा थी, जिसमें पीड़िता रहती थी।
हॉस्टल में कई बार किया दुष्कर्म
शिकायत के अनुसार आरोपी ने हॉस्टल में रह रही किशोरी के साथ कई बार दुष्कर्म किया। पीड़िता ने अपनी मां को बताया कि वह आरोपी को “पापा” कहकर बुलाती थी। एक दिन सिर दर्द का बहाना बनाकर आरोपी ने उसके कमरे में सोने के दौरान गलत हरकत की और दुष्कर्म किया।
पीड़िता ने यह भी बताया कि जब उसने इस बारे में महिला कर्मचारी को बताया, तो उसे चुप रहने के लिए कहा गया। इसके बाद आरोपी ने करीब डेढ़ साल तक कई बार दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी भी दी।
दूसरे मामले के बाद खुला राज
23 जुलाई 2021 को एक अन्य छात्रा द्वारा आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने के बाद यह मामला सामने आया। इसके बाद पीड़िता ने अपनी मां को पूरी घटना बताई, जिसके आधार पर Nehru Colony Police Station में मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दो महीने के भीतर चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी।
पहले भी मिल चुकी है सजा
इससे पहले 28 फरवरी 2026 को इसी अदालत ने हॉस्टल की एक अन्य छात्रा से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि दोनों मामलों में सह-आरोपी महिला को अदालत ने बरी कर दिया है।
अदालत का सख्त रुख
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पीड़िता उस समय महज 15 वर्ष की थी और सातवीं कक्षा में पढ़ती थी।
अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई, जिससे ऐसे अपराधों पर सख्त संदेश गया है।













