ऊधम सिंह नगर: कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्थायी निवास, जाति और अन्य प्रमाणपत्र जारी किए जाने के मामलों में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। बाजपुर और गदरपुर तहसील क्षेत्र में अभिलेखों के सत्यापन में लापरवाही पाए जाने पर दो राजस्व उप निरीक्षकों (पटवारियों) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। दोनों मामलों में जांच रिपोर्ट और उच्चाधिकारियों की संस्तुति के बाद कार्रवाई की गई।
बाजपुर में फर्जी स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्र का मामला
बाजपुर तहसील क्षेत्र में तीन दिन पहले एसडीएम ऋचा सिंह ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्रों का मामला पकड़ा था। जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद उन्हें निरस्त कर दिया गया।
इस मामले में बरहैनी क्षेत्र के लेखपाल की ओर से नगर पंचायत बरखेड़ा के अध्यक्ष श्याम बिहारी समेत नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस नगर पंचायत अध्यक्ष श्याम बिहारी समेत पांच नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
एसडीएम ऋचा सिंह के अनुसार, बिरिया पटवारी सर्किल में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पांच प्रमाणपत्र बनाए गए थे। तहसीलदार पीएस चौहान की 24 सितंबर को प्रस्तुत जांच आख्या में भी अनियमितता की पुष्टि हुई थी।
डीएम नितिन सिंह भदौरिया के निर्देश पर संबंधित पटवारी से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर बिरिया क्षेत्र से संबंधित पटवारी मोहम्मद अजमल खान को उत्तराखंड राजस्व उप निरीक्षक सेवा नियमावली-2025 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
गदरपुर में एमबीबीएस प्रवेश से जुड़े फर्जी प्रमाणपत्र मामले में कार्रवाई
वहीं, गदरपुर तहसील क्षेत्र में एमबीबीएस में प्रवेश के लिए फर्जी प्रमाणपत्र से जुड़े मामले में भी प्रशासन ने कार्रवाई की है। गोविंदपुर क्षेत्र के राजस्व उप निरीक्षक सरताज अली को अभिलेखों के सत्यापन में प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने का दोषी पाए जाने पर निलंबित किया गया है।
शुक्रवार को तहसीलदार लीना चंद्रा धामी की जांच आख्या और एसडीएम डॉ. अमृता शर्मा की संस्तुति के बाद डीएम नितिन भदौरिया के आदेश पर निलंबन की कार्रवाई की गई।
निलंबन के बाद राजस्व उप निरीक्षक सरताज अली को गोविंदपुर क्षेत्र से हटाकर तहसील मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
एक ही जिले की दो अलग-अलग तहसीलों में फर्जी प्रमाणपत्रों से जुड़े मामलों में दो राजस्व उप निरीक्षकों पर हुई कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में भी हलचल बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से प्रमाणपत्र जारी करने और अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया में लापरवाही के मामलों पर कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।











