देहरादून/बागेश्वर: उत्तराखंड में शिक्षक भर्ती से जुड़े प्रमाणपत्रों के सत्यापन के दौरान गड़बड़ियों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बागेश्वर जिले में एक और शिक्षिका के यूटीईटी (उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा) अंकपत्र में अनियमितता मिलने का मामला सामने आया है। जांच में अंकपत्र पर दर्ज अनुक्रमांक किसी दूसरे अभ्यर्थी का पाया गया। इसके बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षिका के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले में इस तरह के मामलों में अब तक 11 शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
राज्य में शिक्षक भर्ती के दौरान प्रस्तुत किए गए शैक्षिक प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अक्टूबर 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट में सामने आई जानकारी के अनुसार, दस्तावेजों के सत्यापन में प्रदेश के 80 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी या कूटरचित पाए जाने की जानकारी दी गई थी।
जनवरी में हुई थी नियुक्ति, सत्यापन में सामने आई गड़बड़ी
राजकीय प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़ी में तैनात शिक्षिका बबीता, पुत्री फकीर राम, की नियुक्ति जनवरी 2026 में हुई थी। नियुक्ति के बाद उनके शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से कराया गया। इस दौरान यूटीईटी अंकपत्र पर दर्ज अनुक्रमांक किसी अन्य अभ्यर्थी का पाया गया।
जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए। प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी आशा राम के अनुसार, बोर्ड से कराए गए सत्यापन में अनुक्रमांक दूसरे अभ्यर्थी का होने की पुष्टि हुई है। शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षिका के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
उत्तराखंड में 80 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी मिलने की जानकारी
शिक्षक भर्ती में दस्तावेजों की कथित गड़बड़ी के मामले केवल बागेश्वर तक सीमित नहीं हैं। अक्टूबर 2026 में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य में सत्यापन के दौरान 80 शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी या कूटरचित पाए गए थे। संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई थी।
इससे पहले जून 2024 में प्रकाशित रिपोर्टों में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले 65 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त किए जाने का उल्लेख किया गया था। वहीं, अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, 69 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे, जिनमें से 52 शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका था। ये आंकड़े अलग-अलग समय और जांच के चरणों से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें जोड़कर कुल मामलों की संख्या मानना उचित नहीं होगा।
एसआईटी जांच में हजारों शिक्षकों के दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया
शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान विशेष जांच दल (एसआईटी) ने वर्ष 2012 से 2016 के बीच नियुक्त 9,602 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की थी। इस संबंध में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, करीब 80 शिक्षकों के विरुद्ध 68 मुकदमे दर्ज किए गए थे।
इन मामलों में शैक्षिक प्रमाणपत्रों के साथ मूल निवास और अन्य दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी के आरोप भी शामिल थे। हालांकि, सभी मामलों में आरोपपत्र दाखिल होने, सुनवाई पूरी होने या दोषसिद्धि की स्थिति का अद्यतन और समेकित ब्योरा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जांच में सामने आई गड़बड़ी और अदालत में अपराध सिद्ध होने के बीच अंतर करना जरूरी है।
बागेश्वर में पहले भी हुई कार्रवाई, अल्मोड़ा में तीन शिक्षकों की सेवाएं समाप्त
अक्टूबर 2026 में बागेश्वर जिले में यूटीईटी प्रमाणपत्रों की जांच के बाद 10 प्राथमिक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी का भी उल्लेख किया गया था। अब शिक्षिका बबीता के प्रमाणपत्र में अनुक्रमांक संबंधी गड़बड़ी का मामला सामने आया है।
इसी महीने अल्मोड़ा जिले में भी यूटीईटी प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद तीन प्राथमिक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त किए जाने की खबर सामने आई थी। लगातार सामने आ रहे इन मामलों से शिक्षक नियुक्तियों के दौरान प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
हजारों शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन लंबित
हाईकोर्ट में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, 17 नवंबर 2025 तक प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 33,055 शिक्षकों में से 24,820 के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा चुका था। वहीं, 7,553 कार्यरत और 682 सेवानिवृत्त शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन लंबित था।
हालांकि, सत्यापन लंबित होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित सभी शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी हैं। किसी दस्तावेज में अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकती है।
शिक्षा विभाग से जिलेवार कार्रवाई का ब्योरा सामने आने की जरूरत
प्रदेश में फर्जी या कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति के मामलों में अब तक कितने शिक्षकों की सेवाएं समाप्त हुई हैं, कितने निलंबित हैं, कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है और कितने प्रकरण अभी जांच के अधीन हैं—इसका एक ही तारीख का अद्यतन समेकित ब्योरा सामने आना जरूरी है।
जिलेवार आंकड़े सार्वजनिक होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि दस्तावेजों में गड़बड़ी पाए जाने के बाद कितने मामलों में कार्रवाई अंतिम स्तर तक पहुंची और कितने मामले अब भी लंबित हैं। साथ ही, पारदर्शी सत्यापन व्यवस्था से वास्तविक रूप से योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में भरोसा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।













