देहरादून। दिव्यांगजनों की शिकायतों एवं समस्याओं के प्रभावी और त्वरित निस्तारण के उद्देश्य से देहरादून में Joint Mobile Court की कार्यवाही आयोजित की गई। यह कार्यवाही आयुक्त, दिव्यांगजन, भारत सरकार एवं आयुक्त, दिव्यांगजन, उत्तराखण्ड के संयुक्त तत्वावधान में हुई। इसमें दिव्यांगजनों से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
कार्यक्रम का शुभारम्भ सचिव, समाज कल्याण, उत्तराखण्ड शासन डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी, IAS ने किया। इस अवसर पर आयुक्त, दिव्यांगजन, भारत सरकार श्री एस. गोविन्दराज, उप आयुक्त, दिव्यांगजन, भारत सरकार श्री विकास त्रिवेदी, आयुक्त, दिव्यांगजन, उत्तराखण्ड श्री सुंदरलाल सेमवाल (PCS), समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में दिव्यांगजन एवं उनके प्रतिनिधि मौजूद रहे।
राजपुर रोड स्थित Red Fox Hotel में आयोजित Joint Mobile Court में कुल 32 प्रकरणों की सुनवाई की गई। दिव्यांगजनों ने व्यक्तिगत रूप से तथा विभिन्न जनपदों से ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित होकर अपनी शिकायतें और समस्याएं न्यायालय के समक्ष रखीं।
सुनवाई के दौरान दिव्यांगता प्रमाण-पत्र एवं UDID कार्ड से जुड़ी समस्याओं, प्रमाण-पत्रों में संशोधन, दिव्यांगता की श्रेणी एवं प्रतिशत से संबंधित मामलों पर विचार किया गया। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं एवं विभिन्न लाभों की उपलब्धता, सहायक उपकरण तथा सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से जुड़े प्रकरण भी सामने आए।
शिक्षा और रोजगार से जुड़े मामलों पर भी हुई सुनवाई
Joint Mobile Court में दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा, परीक्षा एवं प्रवेश से संबंधित समस्याओं के साथ-साथ सरकारी सेवाओं में आरक्षण, पदोन्नति और सेवा संबंधी अधिकारों से जुड़े मामलों को भी रखा गया। कुछ मामलों में कार्यस्थल पर भेदभाव तथा दिव्यांगजनों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने की शिकायतें भी सामने आईं।
इसके अलावा पुलिस एवं प्रशासनिक स्तर पर शिकायतों के निस्तारण, कथित भेदभाव अथवा दुर्व्यवहार, परिवहन एवं आवागमन की सुविधाओं, स्थानीय निकायों से जुड़े विषय, आवास एवं बुनियादी सुविधाओं तथा रोजगार और स्वरोजगार से संबंधित मामलों पर भी सुनवाई की गई।
Joint Mobile Court के माध्यम से दिव्यांगजनों को उनकी शिकायतों के निस्तारण के साथ-साथ उनके अधिकारों और विधिक संरक्षण तक सुगम पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। संबंधित प्रकरणों में आवश्यक कार्रवाई एवं निस्तारण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए।











