जनपद आपातकालीन परिचालन केंद्र की ओर से 2 नवंबर को सुबह 11 बजे जारी संशोधित रिपोर्ट के अनुसार, 30 अक्टूबर को शाम 6:39 बजे ट्रैकिंग एजेंसी ‘सोल सीकर’ के संचालक ने प्रशासन को घटना की सूचना दी थी। बताया गया कि गंगोत्री से केदारताल ट्रेकिंग पर गया दल वापसी के दौरान भारी हिमपात और हिमस्खलन की चपेट में आ गया। इसके बाद करीब चार हजार मीटर की ऊंचाई पर दल के आठ सदस्य लापता हो गए।
हेलीकॉप्टर ने भरी पांच उड़ानें, फिर भी नहीं मिला सुराग
लापता ट्रेकर्स की तलाश के लिए सोमवार सुबह हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया। हेलीकॉप्टर ने पांच उड़ानें भरीं। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) और एसडीआरएफ की टीमों ने अलग-अलग चरणों में केदारताल क्षेत्र पहुंचकर हवाई रेकी और तलाशी अभियान चलाया।
हालांकि, खराब मौसम, भारी हिमपात और कम दृश्यता के कारण अभियान को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। रेस्क्यू टीमें केदारखड़ग (कच्ची ढांग) बेस कैंप में मौजूद रहीं और मौसम अनुकूल होने का इंतजार करती रहीं।
घटनास्थल पर मिले टेंट और बैग, लापता दल का नहीं मिला पता
प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक, एक नवंबर को वन विभाग और ट्रैकिंग एजेंसी के नौ सदस्यीय दल को केदारताल के लिए रवाना किया गया था। टीम ने भोजखड़ग के पास बेस कैंप में रात बिताई।
सोमवार सुबह टीम भोजखड़ग से आगे बढ़ते हुए करीब नौ बजे केदारखड़ग (कच्ची ढांग) पहुंची। इसके बाद दोपहर दो बजे तक लापता ट्रेकर्स की संभावित लोकेशन के आसपास तलाशी अभियान चलाया गया।
इस दौरान घटनास्थल के पास टेंट और बैग बरामद हुए। हालांकि, लापता लोगों से जुड़ा कोई अन्य सुराग नहीं मिल सका। मौसम बिगड़ने के कारण टीम को वापस भोजखड़ग बेस कैंप लौटना पड़ा।
परिजनों को दी गई घटना की जानकारी
आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, लापता ट्रेकर्स के परिजनों से संपर्क कर उन्हें घटना की जानकारी दे दी गई है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी पूरे रेस्क्यू अभियान की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
खराब मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती
चार हजार मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित केदारताल का दुर्गम हिमालयी क्षेत्र रेस्क्यू टीमों के लिए चुनौती बना हुआ है। भारी हिमपात, हिमस्खलन की आशंका और खराब दृश्यता के चलते तलाशी अभियान प्रभावित हो रहा है।
फिलहाल आठों लापता ट्रेकर्स और गाइड की तलाश जारी है। मौसम अनुकूल होने पर रेस्क्यू अभियान को फिर से तेज करने की तैयारी है। लापता लोगों की सुरक्षित बरामदगी के लिए राहत एवं बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं।
रिपोर्ट: नीरज उत्तराखंडी












