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उत्तराखंड के पहाड़ों में विकास की तस्वीर भले ही बदलने के दावे किए जाते हों, लेकिन पौड़ी गढ़वाल के बीरोंखाल विकासखंड का बंगरझल्ला गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार कर रहा है। ग्राम पंचायत गढ़कोट के बंगरझल्ला उपगांव (तोक) में जर्जर पैदल रास्ता, सुरक्षा रेलिंग का अभाव, रात में रोशनी की कमी और कमजोर मोबाइल नेटवर्क ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की बड़ी परेशानी बन चुके हैं।
सबसे ज्यादा चिंता उस रास्ते को लेकर है, जो बंगरझल्ला को मुख्य सड़क से जोड़ता है। इसी रास्ते से बच्चों को स्कूल, बुजुर्गों को जरूरी काम और ग्रामीणों को बाजार व स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने के लिए गुजरना पड़ता है। रास्ते की हालत खराब होने के कारण बरसात में मुश्किल और बढ़ जाती है। कई संवेदनशील स्थानों पर रेलिंग न होने से फिसलने और दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या नई नहीं है। शिकायतें मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से लेकर संबंधित विभागों तक पहुंच चुकी हैं। स्थलीय निरीक्षण और विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया भी हुई, लेकिन ग्रामीणों का सवाल अब भी वही है—आखिर कागजों पर आगे बढ़ रही कार्रवाई जमीन पर कब दिखाई देगी?
बंगरझल्ला की सबसे बड़ी परेशानी: मुख्य सड़क तक पहुंचने वाला जर्जर रास्ता
बंगरझल्ला को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला पैदल मार्ग ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा जैसा है। इसी रास्ते से स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और अन्य ग्रामीण आवाजाही करते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक रास्ते के कई हिस्से खराब हैं। बारिश के दौरान फिसलन बढ़ने से पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह परेशानी और गंभीर हो जाती है।
सबसे बड़ी चिंता तब होती है जब किसी ग्रामीण को अचानक चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ती है। खराब रास्ते के कारण मरीज या बुजुर्ग को मुख्य सड़क तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है।
ग्रामीणों की मांग है कि मुख्य सड़क से गांव तक सीसी मार्ग (CC Road) बनाया जाए, ताकि सालभर सुरक्षित आवाजाही हो सके।
जहां रास्ता खत्म होता है, वहां से डर शुरू होता है! रात में अंधेरे का संकट
बंगरझल्ला में सिर्फ रास्ते की हालत ही चिंता का विषय नहीं है। ग्रामीणों ने स्ट्रीट लाइट की कमी की समस्या भी उठाई है।
रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अंधेरे में आवाजाही करनी पड़ती है। जंगल से सटे क्षेत्र होने के कारण जंगली जानवरों की आवाजाही की आशंका भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ाती है।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए रात में रास्ते से गुजरना और मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त Street Lights और Solar Lights लगाई जाएं तो रात के समय सुरक्षा काफी बेहतर हो सकती है।
रेलिंग नहीं होने से हादसे का खतरा, बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा रेलिंग केवल सुविधा नहीं बल्कि सुरक्षा की जरूरत होती है। बंगरझल्ला के ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर रेलिंग नहीं होने से रास्ता जोखिम भरा हो जाता है।
बरसात के दौरान मिट्टी, पानी और फिसलन के कारण खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण लगातार चिंता जताते रहे हैं।
ग्रामीण चाहते हैं कि दुर्घटना संभावित स्थानों को चिन्हित कर वहां Safety Railing लगाई जाए।
28 मई की CM Helpline शिकायत से 14 अगस्त तक पहुंचा मामला, फिर भी समाधान का इंतजार
बंगरझल्ला की समस्या को लेकर निवासी पंकज नोगाई ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई।
उपलब्ध शिकायत विवरण के अनुसार 28 मई 2026 को CM Helpline पर शिकायत संख्या CMHL-062026-4-1062575 दर्ज की गई थी। इसमें गांव में सीसी मार्ग, रेलिंग और अन्य विकास कार्यों की मांग उठाई गई।
इसके बाद 1 जुलाई 2026 को जिला पंचायत पौड़ी की ओर से कनिष्ठ अभियंता अखिल रावत को शिकायतकर्ता की मौजूदगी में गांव का स्थलीय निरीक्षण करने तथा आवश्यक कार्यवाही के लिए आख्या और आगणन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
साथ ही परियोजना अधिकारी उरेडा को अपेक्षित स्थानों पर Solar Lights लगाने और मुख्य उद्यान अधिकारी को गांव में फलदार पौधों के रोपण के संबंध में कार्रवाई का अनुरोध किया गया।
यानी शिकायत केवल दर्ज होकर रुक नहीं गई, बल्कि संबंधित स्तर पर प्रक्रिया भी आगे बढ़ी। लेकिन ग्रामीणों के लिए असली सवाल अब भी जमीन पर होने वाले काम का है।
31 जुलाई को फिर उठी आवाज, 5 अगस्त को दोबारा CM Helpline पहुंची शिकायत
समस्या का समाधान नहीं होने पर 31 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री के नाम प्रार्थना पत्र भेजकर मुख्य सड़क से बंगरझल्ला तक सीसी मार्ग, दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा रेलिंग और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग दोहराई गई।
इसके बाद 5 अगस्त 2026 को CM Helpline पर एक और शिकायत संख्या CMHL-082026-4-1095072 दर्ज की गई।
शिकायत में मुख्य सड़क तक जाने वाले खराब पैदल मार्ग, बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी, रेलिंग और स्ट्रीट लाइट की कमी तथा सीसी मार्ग निर्माण की मांग दोबारा उठाई गई।
6 अगस्त से 14 अगस्त तक चली कार्रवाई, लेकिन ग्रामीण अब भी पूछ रहे—काम कब शुरू होगा?
उपलब्ध प्रगति विवरण के मुताबिक 5 अगस्त की शिकायत के बाद मामला संबंधित स्तरों पर भेजा गया।
6 अगस्त को शिकायत विकासखंड स्तर पर भेजी गई।
11 अगस्त को इसे संबंधित कार्य क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया।
13 अगस्त को शिकायत की निस्तारण आख्या PDF में अपलोड करने के निर्देश दिए गए।
वहीं 14 अगस्त 2026 को शिकायतकर्ता की असंतुष्टि के आधार पर मामला दोबारा असाइन किया गया।
उपलब्ध विवरण के अनुसार मामला जिला पंचायत अध्यक्ष के अवलोकनार्थ प्रस्तुत किया गया है और स्वीकृति के बाद कार्रवाई किए जाने की बात दर्ज है।
अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि यह प्रक्रिया स्वीकृति से आगे बढ़कर वास्तविक निर्माण कार्य में कब बदलती है।
सिर्फ सड़क नहीं, मोबाइल नेटवर्क भी बड़ी समस्या
बंगरझल्ला के ग्रामीणों ने मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या भी उठाई है।
ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में नेटवर्क कमजोर होने के कारण जरूरी समय पर संचार करना मुश्किल हो जाता है। पहाड़ी और जंगल से सटे इलाकों में किसी आपात स्थिति के दौरान मोबाइल नेटवर्क की कमी परेशानी को और गंभीर बना सकती है।
ग्रामीणों ने क्षेत्र में बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए Mobile Network Tower की आवश्यकता भी बताई है।
ग्रामीणों की मांग साफ है—फाइल नहीं, धरातल पर चाहिए विकास
बंगरझल्ला के ग्रामीणों की मांग बहुत बड़ी नहीं है। वे कोई बड़ी परियोजना नहीं मांग रहे। उनकी प्राथमिकता है—
- मुख्य सड़क से गांव तक CC Road
- दुर्घटना संभावित स्थानों पर Safety Railing
- रास्तों पर पर्याप्त Street Lights/Solar Lights
- रास्तों के आसपास बढ़ी झाड़ियों की सफाई
- बेहतर Mobile Network Connectivity
- मौके पर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण
- स्वीकृति के बाद जल्द से जल्द निर्माण कार्य
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतें दर्ज होने और अधिकारियों तक पहुंचने के बाद अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि काम शुरू होने का इंतजार है।
बंगरझल्ला का सवाल—क्या CM Helpline की शिकायत अब सड़क तक पहुंचेगी?
बंगरझल्ला की कहानी सिर्फ एक गांव की सड़क की कहानी नहीं है। यह उस उम्मीद की कहानी है, जिसमें ग्रामीण शिकायत दर्ज कराते हैं, अधिकारी निरीक्षण के निर्देश देते हैं, फाइल आगे बढ़ती है और फिर ग्रामीण इंतजार करते हैं कि विकास की वह तस्वीर आखिर जमीन पर कब दिखाई देगी।
एक तरफ सरकारी रिकॉर्ड में शिकायत, निरीक्षण और कार्रवाई की प्रक्रिया दर्ज है, दूसरी तरफ गांव के लोग आज भी उसी रास्ते से गुजर रहे हैं—जहां बारिश में फिसलन है, रात में अंधेरा है, कई जगह रेलिंग नहीं है और नेटवर्क की समस्या अलग है।
अब बंगरझल्ला के ग्रामीणों की नजर सिर्फ फाइल की अगली कार्रवाई पर नहीं, बल्कि पहली ईंट, पहली रेलिंग और पहली स्ट्रीट लाइट पर है।
क्योंकि पहाड़ के इस गांव के लिए विकास का मतलब कोई बड़ा वादा नहीं—
बस इतना है कि बच्चे सुरक्षित स्कूल पहुंच सकें, बुजुर्ग बिना डर के सड़क तक जा सकें और रात में घर लौटते समय रास्ता दिखाई दे।
सवाल अब भी कायम है—बंगरझल्ला की बदहाल राह को राहत कब मिलेगी?












