देहरादून/ऊधम सिंह नगर। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा स्थित चर्चित कुलसुम खान फार्म भूमि विवाद (Kulsum Khan Farm Land Dispute) ने अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर नया मोड़ ले लिया है। मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने कड़ा रुख अपनाते हुए किच्छा के उपजिलाधिकारी (SDM) और संबंधित थाना प्रभारी (SHO) को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, उनके पति रॉबर्ट वाड्रा और उनकी जेठानी सायरा वाड्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है।
भाजपा का आरोप: जमीन पर कब्जे की कोशिश
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि प्रियंका गांधी वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा उत्तराखंड में चार एकड़ भूमि पर कब्जा करने की कोशिश में शामिल हैं।
भंडारी के अनुसार, कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ अपने समर्थकों के साथ कथित तौर पर 90 वर्षीय नसरीन खान को जमीन खाली कराने के लिए धमकाने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि यह आरोप स्वयं नसरीन खान के बयानों पर आधारित हैं।
भाजपा का दावा है कि यदि कानूनी प्रक्रिया से जमीन हासिल नहीं हो पा रही है, तो दबाव और धमकी का सहारा लिया जा रहा है।
क्या है कुलसुम खान फार्म भूमि विवाद?
यह विवाद किच्छा क्षेत्र के पिपलिया मोड़ स्थित कुलसुम खान फार्म से जुड़ा है, जहां संपत्ति के स्वामित्व को लेकर दो पक्ष आमने-सामने हैं।
याचिका के अनुसार, कुलसुम खान ने वर्ष 2024 में पंजीकृत वसीयत के माध्यम से अपनी संपत्ति सायरा वाड्रा और अपने चचेरे भतीजे सिकंदर आलम खान के नाम कर दी थी।
बताया गया है कि 18 दिसंबर 2025 को कुलसुम खान के निधन के बाद संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हुआ। दूसरी ओर नसरीन खान इस संपत्ति पर अपना अधिकार जता रही हैं।
हाईकोर्ट में क्या कहा गया?
सिकंदर आलम खान की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि 11 जून 2026 को सिविल कोर्ट द्वारा यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिए जाने के बावजूद प्रशासन ने कथित रूप से दूसरे पक्ष को संपत्ति पर कब्जा दिला दिया।
याचिका में यह भी दावा किया गया कि फार्म परिसर में मौजूद महिलाओं, बच्चों और पशुओं को कई दिनों तक अंदर ही रहने के लिए मजबूर किया गया तथा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
हाईकोर्ट ने SDM और SHO को किया तलब
मामले की सुनवाई के दौरान उत्तराखंड हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए किच्छा के SDM और संबंधित SHO को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही न्यायालय ने प्रशासन को 11 जून को सिविल कोर्ट द्वारा दिए गए यथास्थिति आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
6 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
अब इस बहुचर्चित भूमि विवाद की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी। अदालत के समक्ष प्रशासन को अपनी कार्रवाई का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना होगा। वहीं भाजपा के आरोपों और न्यायिक कार्रवाई के बाद यह मामला प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।










