घटना का प्लान बेटे ने ही किया था तैयार
एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के अनुसार, 29 नवंबर की रात यशपाल ने कंट्रोल रूम में फोन कर बताया था कि वह पिता के साथ रोशनाबाद शादी में जा रहा था, तभी जटवाड़ा पुल के पास एक युवक ने लिफ्ट मांगी और कार में बैठते ही उसके पिता को गोली मारकर फरार हो गया।
पहली नजर में मामला लूट या लिफ्ट मांगकर की गई हत्या का प्रतीत हुआ, लेकिन घटनास्थल पर पहुंची पुलिस टीम को बेटे के बयान संदिग्ध लगे। शादी किस दोस्त की थी—इस सवाल पर भी यशपाल संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। लगातार बदलते बयान ने पुलिस का शक गहरा दिया।
पूछताछ में टूट गया बेटा, कबूला पूरा सच
सख्ती से पूछताछ में यशपाल के जवाब उलझते गए और आखिरकार वह टूट गया। उसने खुलासा किया कि पिता द्वारा संपत्ति अपने नाम ना करने और गलत संगत के कारण आए विवादों से परेशान होकर उसने अपने दो दोस्तों ललित मोहन उर्फ राजन और शेखर के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि यशपाल ने हत्या के बदले राजन और शेखर को 30 लाख रुपये और एक स्कॉर्पियो गाड़ी देने का सौदा तय किया था।
दोपहर में की रेकी, रात में दी वारदात को अंजाम
29 नवंबर की दोपहर तीनों ने नहर पटरी पर रेकी की। रात लगभग 8 बजे वह पिता को शादी का बहाना बनाकर कार से घर से निकला। जटवाड़ा पुल से आगे बैराज के पास उसके दोनों साथी पहले से ही तैयार खड़े थे।
योजना के तहत यशपाल ने पिता से कार रुकवाई और खुद ड्राइवर सीट पर बैठ गया। वहीं राजन को उसने अपने पिता के सामने “दोस्त” बताकर कार में बैठाया। कार कुछ ही दूरी चली कि राजन ने तमंचा निकालकर भगवान सिंह की कनपटी पर दो गोलियां दाग दीं। वारदात के बाद वह मौके से फरार हो गया, जबकि यशपाल ने अनजान बनकर 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की।
तमंचा, कारतूस और वारदात में पहने कपड़े बरामद
पुलिस ने यशपाल, ललित मोहन उर्फ राजन और शेखर को गिरफ्तार कर लिया है। राजन की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल तमंचा, एक खोखा कारतूस और वारदात के समय पहने कपड़े व जूते उसके किराए के कमरे से बरामद किए गए हैं।













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