देहरादून। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय (एसजीआरआरयू), देहरादून और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) के बीच अनुसंधान सहयोग, क्षमता निर्माण, अकादमिक सहभागिता और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों संस्थानों के बीच हुआ यह समझौता संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं और वैज्ञानिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के माननीय प्रेसीडेंट श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में हुए इस एमओयू को लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विपिन चन्द्र घिल्डियाल ने विश्वविद्यालय टीम को बधाई दी।
नई दिल्ली स्थित सीसीआरएच मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत दोनों संस्थान आपसी रुचि के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, वैज्ञानिक एवं अकादमिक गतिविधियों, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, प्रशिक्षण, कार्यशालाओं तथा ज्ञान और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के लिए मिलकर कार्य करेंगे।
इस अवसर पर सीसीआरएच के प्रतिनिधिमंडल में महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक, डॉ. के.सी. मुरलीधरन, वैज्ञानिक-डी डॉ. रेनू मित्तल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव डॉ. सोनिका कंडारी, प्रोफेसर डॉ. द्वारिका पी. मैठाणी, स्कूल ऑफ बेसिक एंड एप्लाइड साइंसेज (एसबीएएस) के डीन डॉ. पंकज चमोली तथा स्कूल रिसर्च कोऑर्डिनेटर डॉ. सुभाष चंद्र ने प्रतिनिधित्व किया।
एमओयू के माध्यम से एसजीआरआर विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान संस्थान के साथ वैज्ञानिक संवाद तथा सहयोगात्मक शोध गतिविधियों में भागीदारी के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही अंतर्विषयक अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और संस्थागत अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने पर भी दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे।
विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों के अनुसार, श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में एसजीआरआर विश्वविद्यालय अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सार्थक सहयोग को लगातार बढ़ावा दे रहा है। सीसीआरएच के साथ हुआ यह एमओयू इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस समझौते से भविष्य में संयुक्त शोध परियोजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और क्षमता निर्माण के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है। साथ ही, अनुसंधान, शिक्षा, नवाचार, वैज्ञानिक क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को मजबूती मिलेगी।











