Stock Market Crash: वैश्विक शेयर बाजारों में शुक्रवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। अमेरिका द्वारा कई देशों पर 10% टैरिफ लागू किए जाने के बाद एशियाई बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई देने के संकेत मिल रहे हैं। प्रमुख संकेतक Gift Nifty में करीब 200 अंकों की कमजोरी देखी गई, जिससे Sensex और Nifty के कमजोर शुरुआत करने की संभावना जताई जा रही है।
ट्रंप के 10% टैरिफ का वैश्विक बाजारों पर असर
अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत जांच पूरी होने के बाद भारत सहित 17 देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10% टैरिफ लागू कर दिया है। यह फैसला 24 जुलाई से प्रभावी हो गया है। इस घोषणा के बाद वैश्विक निवेशकों में चिंता बढ़ गई और एशियाई शेयर बाजारों में भारी बिकवाली शुरू हो गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए टैरिफ से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है, जिससे वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
जापान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में बड़ी गिरावट
टैरिफ लागू होने के बाद एशियाई बाजारों में भारी कमजोरी देखने को मिली।
- जापान का Nikkei Index में लगभग 2,000 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।
- दक्षिण कोरिया का KOSPI Index करीब 6% तक टूट गया।
- हांगकांग का Hang Seng Index भी लगभग 2% की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।
- यूरोप के प्रमुख सूचकांक DAX, CAC और FTSE-100 भी दबाव में कारोबार करते नजर आए।
भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव
वैश्विक कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। Gift Nifty में लगभग 200 अंकों की गिरावट इस बात का संकेत दे रही है कि Sensex और Nifty कमजोर शुरुआत कर सकते हैं।
पिछले कारोबारी सत्र में भी भारतीय बाजार लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुए थे।
- Sensex 363 अंक टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ।
- Nifty 50 127 अंक गिरकर 23,869.60 के स्तर पर बंद हुआ।
बाजार में गिरावट की अन्य प्रमुख वजहें
टैरिफ के अलावा कई वैश्विक घटनाक्रम भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
- अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव।
- मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम।
- होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल एवं गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका।
- समुद्री मार्गों पर सुरक्षा संबंधी घटनाओं से वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव।
- कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा।
इन कारणों से वैश्विक निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है और शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ा है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशकों को घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, इसलिए निवेश से पहले जोखिम का आकलन करना और दीर्घकालिक रणनीति अपनाना बेहतर माना जा रहा है।











