त्यूणी, देहरादून | नीरज उत्तराखंडी
देहरादून जिले के सीमांत क्षेत्र त्यूणी और आसपास के बाजारों में बेहद कम कीमत पर पहुंच रही मिठाइयों के कारोबार को लेकर खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार हिमाचल प्रदेश के सोलन क्षेत्र से वाहन के जरिए कुछ व्यापारी कथित तौर पर 100 से 150 रुपये प्रति किलो के थोक भाव में बर्फी जैसी मिठाइयां स्थानीय दुकानदारों को उपलब्ध करा रहे हैं। यही मिठाई बाजार में कथित तौर पर 200 से 400 रुपये प्रति किलो तक बेचे जाने की बात सामने आई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सस्ती मिठाई लेकर आने वाले वाहन करीब हर 15 दिन में क्षेत्र के बाजारों में पहुंचते हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मिठाइयों की वास्तविक गुणवत्ता, निर्माण स्थल, सामग्री, निर्माण तिथि और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
इतनी कम कीमत पर मिठाई कैसे तैयार हो रही?
स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा सवाल मिठाई की लागत को लेकर है। उनका कहना है कि दूध, खोया, चीनी, घी और अन्य खाद्य सामग्री की कीमतें सामान्य स्तर पर हैं, ऐसे में 100 से 150 रुपये प्रति किलो के थोक मूल्य पर मिठाई किस लागत में तैयार हो रही है, इसकी जांच होनी चाहिए।
लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि इन मिठाइयों में दूध और खोये का कितना इस्तेमाल किया जा रहा है, मिठाई का निर्माण कहां हो रहा है, इसे कितने समय पहले तैयार किया गया और परिवहन व भंडारण के दौरान खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
इन सवालों का वास्तविक जवाब खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
बिना स्पष्ट पहचान वाली मिठाइयों को लेकर भी चिंता
सूत्रों के अनुसार बाहर से आने वाली कुछ मिठाइयां बिना स्पष्ट ब्रांड, निर्माता की जानकारी अथवा आवश्यक विवरण के खुले या सामान्य पैकिंग में दुकानों तक पहुंचती हैं। यदि ऐसा है तो उपभोक्ताओं के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि उत्पाद कहां तैयार हुआ, कब तैयार हुआ और उसकी गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार कौन है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मिठाई खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप है तो जांच के जरिए इसकी पुष्टि होनी चाहिए। वहीं नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
हर 15 दिन में पहुंचने का दावा, फिर जांच क्यों नहीं?
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि करीब हर 15 दिन में सस्ती मिठाई लेकर वाहन क्षेत्र के बाजारों में पहुंचते हैं। इस दावे के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि बाहरी क्षेत्रों से खाद्य सामग्री लेकर आने वाले वाहनों और उनसे जुड़े कारोबारियों की खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा नियमित सैंपलिंग और जांच की गई है या नहीं।
स्थानीय लोगों ने विभाग से मांग की है कि त्यूणी और आसपास के बाजारों में अचानक निरीक्षण अभियान चलाकर मिठाइयों के नमूने लिए जाएं। हालांकि, जिम्मेदार अधिकारियों पर लगाए गए लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
100-150 रुपये में खरीद, 200-400 रुपये में बिक्री
इस पूरे मामले में कीमत का अंतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार जिस मिठाई की थोक कीमत 100 से 150 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है, वही मिठाई स्थानीय बाजार में 200 से 400 रुपये प्रति किलो तक बेचे जाने की बात सामने आई है।
यदि यह दावा सही है तो कारोबारियों को अच्छा मार्जिन मिल रहा है। लेकिन उपभोक्ताओं के लिए सबसे अहम सवाल केवल कीमत नहीं, बल्कि मिठाई की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा का है।
त्योहारों से पहले सैंपलिंग की मांग
त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में यदि किसी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता संदिग्ध है या खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है तो बड़ी संख्या में उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं।
इसी को देखते हुए स्थानीय लोगों ने त्यूणी सहित आसपास के बाजारों में विशेष जांच अभियान चलाने की मांग की है। इसमें बाहर से मिठाई लाने वाले वाहनों, कारोबारियों, निर्माण स्थल, भंडारण व्यवस्था और दुकानों तक पहुंचने वाली पूरी सप्लाई चेन की जांच की मांग उठ रही है।
उपभोक्ता की सेहत सर्वोपरि
खाद्य पदार्थों के कारोबार में मुनाफे के साथ उपभोक्ता की सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि जांच में मिठाइयां निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरती हैं तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वहीं यदि मिलावट, खराब गुणवत्ता या खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई जरूरी होगी।
फिलहाल त्यूणी के बाजारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 100 से 150 रुपये प्रति किलो के थोक भाव में बताई जा रही मिठाई आखिर इतनी सस्ती क्यों है? इसका जवाब नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?
वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने बताया कि पर्याप्त संसाधन और कर्मचारियों की कमी के साथ-साथ क्षेत्र के दूरस्थ एवं सीमांत होने के कारण नियमित निरीक्षण में व्यावहारिक कठिनाइयां आती हैं।
उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और शीघ्र ही संबंधित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता तथा आपूर्ति व्यवस्था की जांच की जाएगी। जांच के दौरान यदि नकली मिठाई, पनीर अथवा अन्य खाद्य पदार्थों की अवैध आपूर्ति की पुष्टि होती है तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।










