उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 14 अगस्त को हुए नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में हंगामे, पांच बीडीसी सदस्यों के कथित अपहरण और एक मतपत्र में ओवरराइटिंग के गंभीर आरोपों पर सख्त रुख अपनाते हुए एसएसपी समेत सभी संबंधित पाँचों जिला पंचायत सदस्यों को 3 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई भी 3 दिसंबर को ही निर्धारित है।
क्या है मामला?
14 अगस्त को नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान हंगामा हुआ था। कई निर्वाचित सदस्य अचानक लापता हो गए, जिसके बाद अपहरण की आशंका व्यक्त की गई। स्थिति गंभीर होने पर उच्च न्यायालय ने स्वयं संज्ञान लिया।
कुछ जीते हुए सदस्य सुरक्षा की मांग को लेकर सीधे हाईकोर्ट की शरण में भी पहुंचे थे।
ओवरराइटिंग मामले पर भी सुनवाई
इसी प्रकरण में बीडीसी सदस्य पूनम बिष्ट ने एक अलग याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के मतदान में एक मतपत्र पर ओवरराइटिंग कर क्रमांक 1 को 2 कर दिया गया, जिसके चलते उस वोट को अमान्य घोषित कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने अदालत से पुनः मतदान (Re-Polling) कराने की मांग की है, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित हो सके।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का दबाव, अपहरण, या गलत प्रक्रिया स्वीकार्य नहीं है। इसी आधार पर सभी संबंधित अधिकारियों और सदस्यों की पेशी अनिवार्य की गई है।











