Nainital: उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। Uttarakhand High Court की मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को जून के पहले सप्ताह में चयन समिति की बैठक आयोजित कर 16 जून तक प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के रवैये पर तल्ख टिप्पणियां भी कीं।
मुख्य न्यायाधीश Manoj Kumar Gupta और न्यायमूर्ति Subhash Upadhyay की खंडपीठ में शुक्रवार को हल्द्वानी निवासी Ravishankar Joshi की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
सरकार ने अदालत से मांगा अतिरिक्त समय
मुख्य सचिव Anand Bardhan की ओर से अदालत में शपथपत्र दाखिल किया गया। इसमें कहा गया कि लोकायुक्त के चयन के लिए सर्च कमेटी गठन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन प्रक्रिया की जटिलता और व्यापकता को देखते हुए नियुक्ति में और समय लग सकता है। सरकार ने अदालत से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध भी किया।
शपथपत्र में बताया गया कि 3 अप्रैल 2026 को चयन समिति की बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन अपरिहार्य कारणों से नहीं हो सकी। इसके बाद 29 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष, न्यायमूर्ति और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति शामिल हुए। हालांकि नेता प्रतिपक्ष बैठक में मौजूद नहीं हो सके।
सर्च कमेटी में विशेषज्ञों को शामिल करने की तैयारी
बैठक में लोकायुक्त चयन के लिए सर्च कमेटी गठन पर चर्चा हुई। समिति ने फैसला लिया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। इसके अलावा वित्त, बीमा, बैंकिंग, विधि और प्रबंधन क्षेत्र के विशेषज्ञों के नाम भी अगली बैठक में रखे जाएंगे।
लोकायुक्त कार्यालय के खर्च और कर्मचारियों का वेतन अटका
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्तमान में लोकायुक्त कार्यालय में 9 कर्मचारी कार्यरत हैं। अदालत के पूर्व आदेशों के चलते कर्मचारियों के वेतन और कार्यालय खर्च जारी करने में दिक्कत आ रही है। जनवरी 2026 से कर्मचारियों का वेतन, बिजली, पानी और टेलीफोन बिल लंबित हैं।
सरकार ने अदालत से अनुरोध किया कि कर्मचारियों के वेतन और कार्यालय संचालन से जुड़े खर्चों के नियमित भुगतान की अनुमति दी जाए।
16 जून को होगी अगली सुनवाई
महाधिवक्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि जून के पहले सप्ताह में चयन समिति की अगली बैठक प्रस्तावित है, जिसमें सर्च कमेटी के नामों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद खंडपीठ ने सरकार को 16 जून तक का समय देते हुए मुख्य सचिव को प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी।
याचिका में भ्रष्टाचार जांच तंत्र पर उठाए गए सवाल
जनहित याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड में लंबे समय से लोकायुक्त का पद खाली पड़ा हुआ है, जबकि राज्य सरकार हर साल लोकायुक्त कार्यालय पर 2 से 3 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि लोकायुक्त के अभाव में भ्रष्टाचार के मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए कोई स्वायत्त तंत्र मौजूद नहीं है। साथ ही राज्य की जांच एजेंसियों के सरकार के नियंत्रण में होने के कारण उनकी निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं।










