देहरादून में भालुओं द्वारा किसानों की फसलों को लगातार पहुंचाए जा रहे नुकसान के खिलाफ राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी (RRP) ने शुक्रवार को वन विभाग मुख्यालय, राजपुर रोड पर जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने अनोखे अंदाज में भालू की वेशभूषा पहनकर प्रदर्शन किया और वाइल्डलाइफ वार्डन विवेक पांडे के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा।
प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने सरकार और वन विभाग पर किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। नेताओं का कहना था कि राज्य में भालुओं द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने पर किसानों को मुआवजा देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जबकि अन्य वन्यजीवों से होने वाले नुकसान पर मुआवजा दिया जाता है।
पार्टी नेताओं ने एक स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए कहा कि प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा ने भी स्वीकार किया है कि भालू से फसल क्षति होने पर मुआवजा देने की व्यवस्था अभी तक लागू नहीं की गई है। इसे लेकर पार्टी ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि पहाड़ का किसान पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहा है और अब जंगली भालुओं द्वारा फसल बर्बाद किए जाने से उसकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि जब मानव और पशु क्षति पर मुआवजा दिया जा सकता है तो किसानों की फसल बर्बाद होने पर राहत क्यों नहीं दी जा रही।
प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मुआवजा नीति लागू नहीं की गई तो पार्टी पूरे उत्तराखंड में बड़ा आंदोलन करेगी।
जिला अध्यक्ष नवीन पंत ने कहा कि वन विभाग चार महीने पहले प्रस्ताव शासन को भेजने की बात कह रहा है, लेकिन अब तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। इससे साफ है कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
प्रदर्शन में शामिल किसानों और कार्यकर्ताओं ने मांग की कि भालुओं द्वारा फसल नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरित किया जाए। साथ ही वन्यजीवों से फसलों की सुरक्षा के लिए स्थायी कार्ययोजना तैयार करने की भी मांग उठाई गई।
धरना प्रदर्शन में राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल, प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल, योगेश ईष्टवाल, भगवती प्रसाद नौटियाल, नवीन पंत, विनोद कोठियाल, शशि रावत, बसंती गोस्वामी, मंजू रावत, सुशील पटवाल, जगदंबा बिष्ट, रेनू नवानी, रजनी कुकरेती, मीना थपलियाल, हेमा कोटनाला, प्रवीण भारद्वाज, शोभित भद्री, सुरेंद्र चौहान, सुमित थपलियाल, आशीष नौटियाल और पंकज उनियाल समेत बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता मौजूद रहे।










