Ujjwala LPG Cylinders Subsidy News: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत लाभार्थियों को मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की वार्षिक सीमा में बड़ा बदलाव किया है। अब उज्ज्वला योजना के तहत एक परिवार को साल में 9 की बजाय केवल 4 सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर मिलेंगे। सरकार का कहना है कि यह फैसला लाभार्थियों की औसत गैस खपत और बढ़ती सब्सिडी लागत को ध्यान में रखकर लिया गया है।
Ujjwala LPG Cylinders: क्या है सरकार का नया फैसला?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत पहले लाभार्थियों को हर साल 9 सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाते थे। अब इस संख्या को घटाकर 4 सिलेंडर प्रति वर्ष कर दिया गया है।
सरकार के अनुसार, अधिकांश उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत इसी स्तर के आसपास है। ऐसे में सब्सिडी को अधिक प्रभावी और लक्षित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
PM Ujjwala Yojana की शुरुआत कब हुई थी?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की गई थी। इस योजना का उद्देश्य गरीब और ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना था ताकि महिलाएं लकड़ी, कोयला और गोबर के उपलों से होने वाले धुएं से बच सकें।
योजना के शुरुआती चरण में लाभार्थियों को सालाना 12 सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम LPG सिलेंडर दिए जाते थे।
समय के साथ बदलाव
- 2016: 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर
- पिछले वर्ष: 9 सब्सिडी वाले सिलेंडर
- वर्तमान निर्णय: 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर
LPG Subsidy कितनी मिलती है?
सरकार ने मई 2022 में उज्ज्वला योजना लाभार्थियों के लिए 200 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी शुरू की थी।
बाद में अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया।
यह राशि गैस सिलेंडर की रिफिल बुकिंग के बाद सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाती है।
LPG Cylinder Price Increase: गैस सिलेंडर की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं
देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में पिछले कुछ महीनों के दौरान कई बार बढ़ोतरी हुई है।
दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत बढ़कर लगभग 942 रुपये तक पहुंच गई है।
हालांकि, उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद प्रभावी कीमत लगभग 642 रुपये पड़ती है।
क्यों घटाई गई सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या?
सरकार का कहना है कि यह फैसला निम्न कारणों से लिया गया है:
1. औसत घरेलू खपत के अनुसार
अधिकांश उज्ज्वला लाभार्थी सालभर में सीमित संख्या में सिलेंडरों का उपयोग करते हैं। नई सीमा इसी औसत खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है।
2. बढ़ती सब्सिडी लागत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सरकार पर सब्सिडी का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
3. वित्तीय संतुलन बनाए रखना
सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सहायता जारी रखते हुए सब्सिडी खर्च को संतुलित रखना है।
Middle East Crisis का LPG कीमतों पर असर
वैश्विक स्तर पर LPG की कीमतों में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ा तनाव और सप्लाई चेन की चुनौतियां हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- फरवरी के बाद अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों में करीब 46 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सप्लाई प्रभावित होने से गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है।
- भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
सरकार प्रति सिलेंडर कितना खर्च कर रही है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में एक घरेलू LPG सिलेंडर की आपूर्ति लागत लगभग 1,600 रुपये तक पहुंच गई है।
इसके बावजूद उपभोक्ताओं को काफी कम कीमत पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलने वाली प्रत्यक्ष सब्सिडी और अन्य सहायता को मिलाकर सरकार प्रत्येक सिलेंडर पर बड़ी राशि वहन कर रही है।
2022 से अब तक LPG Subsidy पर कितना खर्च?
सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 से अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है।
इसका उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना और रसोई गैस को उनकी पहुंच में बनाए रखना है।
उज्ज्वला योजना लाभार्थियों पर क्या पड़ेगा असर?
नई व्यवस्था के बाद लाभार्थियों को साल में केवल 4 सिलेंडरों पर ही 300 रुपये की सब्सिडी का लाभ मिलेगा। इससे उन परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है जिनकी गैस खपत अधिक है।
हालांकि सरकार का मानना है कि नई सीमा अधिकांश लाभार्थियों की वास्तविक खपत के अनुरूप है।
Ujjwala LPG Cylinders Subsidy Update के तहत सरकार ने सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी है। यह फैसला बढ़ती LPG कीमतों, अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और सब्सिडी खर्च को नियंत्रित करने की आवश्यकता को देखते हुए लिया गया है। आने वाले समय में इसका सीधा असर करोड़ों उज्ज्वला योजना लाभार्थियों के घरेलू बजट पर देखने को मिल सकता है।












