देहरादून। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच कृषि, बागवानी और वानिकी को अधिक टिकाऊ और जलवायु-लचीला बनाने की दिशा में श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय (SGRRU) में विशेषज्ञों ने व्यापक मंथन किया। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, जो आईसीएआर से मान्यता प्राप्त है, की ओर से 15वें अंतरराष्ट्रीय कृषि, बागवानी एवं वानिकी सम्मेलन का आयोजन किया गया।
दो दिवसीय इस सम्मेलन का विषय “कृषि, बागवानी एवं वानिकी: जलवायु-लचीली फसल प्रणालियों के लिए नवाचार” रहा। हाइब्रिड मोड में आयोजित सम्मेलन में भारत सहित विदेशों से 200 से अधिक वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, कृषि विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के बीच कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को अधिक टिकाऊ, उत्पादक और लचीला बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार की भूमिका पर चर्चा की गई।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड सरकार के पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. जी.एस. सचदेवा और पंजाब सरकार के गन्ना आयुक्त डॉ. अमरीक सिंह ने सहभागिता की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई), देहरादून के जेनेटिक्स एवं ट्री इम्प्रूवमेंट डिवीजन के प्रमुख डॉ. मनीष भंडारी, जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के एग्रोनॉमी प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार राठी तथा आईसीएआर-आईआईएसडब्ल्यूसी, देहरादून के जेनेटिक्स एवं प्लांट ब्रीडिंग विशेषज्ञ डॉ. अनुपम बड़ मौजूद रहे।
इस अवसर पर जस्ट एग्रीकल्चर एजुकेशन ग्रुप के संस्थापक एवं सीईओ डॉ. डी.पी.एस. बड़वाल, इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट की अध्यक्ष डॉ. सुशीला हुड्डा और एसजीआरआरयू के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज के डीन डॉ. हितेंद्र कुमार सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि, बागवानी और वानिकी के सामने पैदा हो रही चुनौतियों पर चर्चा की। बदलते मौसम का फसल उत्पादन पर असर, टिकाऊ कृषि पद्धतियां, आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत फसल प्रणालियां और जलवायु के अनुरूप कृषि विकास जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में ऐसी कृषि तकनीकों और फसल प्रणालियों को बढ़ावा देने की जरूरत है, जो सीमित संसाधनों में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी बनाए रखने में मदद करें। इसके लिए कृषि, बागवानी और वानिकी के क्षेत्र में अनुसंधान तथा नवाचार को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण बताया गया।
सम्मेलन में कृषि को केवल खाद्य उत्पादन तक सीमित न रखते हुए इसे खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका से जोड़कर देखा गया। वहीं बागवानी को पोषण, किसानों की आय और कृषि विविधीकरण से तथा वानिकी को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु संतुलन से जोड़ते हुए इनके बीच समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि क्षेत्र को नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है। ऐसे प्रयास किसानों की आय, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।












