Tuesday, August 11, 2026
  • About
  • Contact
  • Home
  • Privacy Policy
  • Term & Condition
  • Home
  • देश-दुनिया
  • उत्तराखंड
  • राजनीती
  • नौकरी
  • क्राइम
  • हेल्थ
  • हादसा
  • शिक्षा
  • More
    • एंटरटेनमेंट
    • बाजार समाचार
    • लाइफ स्टाइल
    • रियल स्टेट
    • मौसम
    • मनी और निवेश
    • टेक न्यूज़
    • क्रिकेट
No Result
View All Result
  • Home
  • देश-दुनिया
  • उत्तराखंड
  • राजनीती
  • नौकरी
  • क्राइम
  • हेल्थ
  • हादसा
  • शिक्षा
  • More
    • एंटरटेनमेंट
    • बाजार समाचार
    • लाइफ स्टाइल
    • रियल स्टेट
    • मौसम
    • मनी और निवेश
    • टेक न्यूज़
    • क्रिकेट
No Result
View All Result
No Result
View All Result

Ancestral Property – सुप्रीम कोर्ट का फैसला।पिता की पैतृक संपत्ति में अब बेटी का भी होगा अधिकार

January 12, 2023
in उत्तराखंड
Supreme Court’s Decision- किरायेदारों के लिए खुशी की खबर। रेट की टेंशन खत्म। सुप्रीम कोर्ट का फैसला
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

Ancestral Property – सुप्रीम कोर्ट का फैसला।पिता की पैतृक संपत्ति में अब बेटी का भी होगा अधिकार 

Ancestral Property: सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के हक में एक बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पिता के पैतृक की संपत्ति में बेटी का बेटे के बराबर हक है, थोड़ा सा भी कम नहीं। उसने कहा कि बेटी जन्म के साथ ही पिता की संपत्ति में बराबर का हकददार हो जाती है। देश की सर्वोच्च अदालत की तीन जजों की पीठ ने आज स्पष्ट कर दिया कि भले ही पिता की मृत्यु हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 लागू होने से पहले हो गई हो, फिर भी बेटियों को माता-पिता की संपत्ति पर अधिकार होगा।

You might also like

अब दफ्तरों के चक्कर नहीं! दिव्यांगजनों की शिकायतों के लिए सितंबर में लगेगा मोबाइल कोर्ट

किसानों के लिए बड़ी खबर! देहरादून में बढ़ेगी अरहर-उड़द-मसूर की खेती, 2030-31 तक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

SIR Voter List 2026: मतदाता घबराएं नहीं! Anomaly और No-Mapping पर CDO ने दिया बड़ा अपडेट

(Ancestral Property,Ancestral Property meaning,Ancestral Property partition,

Ancestral Property Supreme Court judgement,Ancestral Property after partition,Ancestral Property rights)

बेटी की मृत्यु हुई तो उसके बच्चे हकदार–

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पिता की पैतृक संपत्ति में बेटी को अपने भाई से थोड़ा भी कम हक नहीं है। उसने कहा कि अगर बेटी की मृत्यु भी 9 सितंबर, 2005 से पहले हो जाए तो भी पिता की पैतृक संपत्ति में उसका हक बना रहता है। इसका मतलब यह है कि अगर बेटी के बच्चे चाहें कि वो अपनी मां के पिता (नाना) की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी लें तो वो इसका दावा ठोक सकते हैं, उन्हें अपनी मां के अधिकार के तौर पर नाना की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी मिलेगी।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

देश में 9 सितंबर, 2005 से हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 लागू हुआ है। इसका मतलब है कि अगर पिता की मृत्यु 9 सितंबर, 2005 से पहले हो गई हो तो भी बेटियों को पैतृक संपत्ति पर अधिकार होगा। जस्टिस अरुण मिश्री की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने यह महत्वपूर्ण फैसला दिया। जस्टिस मिश्रा ने फैसला पढ़ते हुए कहा, ‘बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार देना हो होगा क्योंकि बेटी पूरी जिंदगी दिल के करीब रहती है। बेटी आजीवन हमवारिस ही रहेगी, भले ही पिता जिंदा हों या नहीं।’

(Ancestral Property,Ancestral Property meaning,Ancestral Property partition,

Ancestral Property Supreme Court judgement,Ancestral Property after partition,Ancestral Property rights)

पहले क्या था नियम?

हिंदू सक्सेशन ऐक्ट, 1956 में साल 2005 में संशोधन कर बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान हिस्सा पाने का कानूनी अधिकार दिया गया। इसके तहत, बेटी तभी अपने पिता की संपत्ति में अपनी हिस्सेदारी का दावा कर सकती है जब पिता 9 सितंबर, 2005 को जिंदा रहे हों। अगर पिता की मृत्यु इस तारीख से पहले हो गई हो तो बेटी का पैतृक संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होगा।

अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे बदलते हुए कहा कि पिता की मृत्यु से इसका कोई लेन-देन नहीं है। अगर पिता 9 सितंबर, 2005 को जिंदा नहीं थे, तो भी बेटी को उनकी पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलेगा। यानी, 9 सितंबर, 2005 से पहले पिता की मृत्यु के बावजूद बेटी का हमवारिस (Coparecenor) होने का अधिकार नहीं छिनेगा।

HUF फैमिली और हमवारिस-

हमवारिस या समान उत्तराधिकारी वे होते/होती हैं जिनका अपने से पहले की चार पीढ़ियों की अविभाजित संपत्तियों पर हक होता है। 2005 से पहले हिंदू उत्तराधिकार कानून में बेटियां सिर्फ हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) की सदस्य मानी जाती थीं, हमवारिस यानी समान उत्तराधिकारी नहीं।

हालांकि, बेटी का विवाह हो जाने पर उसे हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) का भी हिस्सा नहीं माना जाता है।

 2005 के संशोधन के बाद बेटी को हमवारिस यानी समान उत्तराधिकारी माना गया है। अब बेटी के विवाह से पिता की संपत्ति पर उसके अधिकार में कोई बदलाव नहीं आता है। यानी, विवाह के बाद भी बेटी का पिता की संपत्ति पर अधिकार रहता है।

(Ancestral Property,Ancestral Property meaning,Ancestral Property partition,

Ancestral Property Supreme Court judgement,Ancestral Property after partition,Ancestral Property rights)

2005 के संशोधन की बड़ी बातें-

इसके तहत महिलाओं को पैतृक संपत्ति में बेटे के बराबर अधिकार दे दिया गया और तमाम भेदभाव को खत्म कर दिया गया। बेटी को पैतृक संपत्ति में जन्म से ही साझीदार बना दिया गया। बेटी और बेटे जन्म से पिता और पैतृक संपत्ति में बराबर के अधिकारी बना दिए गए। इसके तहत बेटियों को इस बात का भी अधिकार दिया गया कि वह कृषि भूमि का बंटवारा करवा सकती है।

साथ ही शादी टूटने की स्थिति में वह पिता के घर जाकर बेटे के समान बराबरी का दर्जा पाते हुए रह सकती है यानी पिता के घर में भी उसका उतना ही अधिकार होगा जिनता बेटे को है। बेटे और बेटी दोनों को जन्म से ही बराबरी का दर्जा दे दिया गया।

बेटी कब पैदा हुई, कोई फर्क नहीं-

हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 कहता है कि कोई फर्क नहीं पड़ता है कि बेटी का जन्म 9 सितंबर, 2005 से पहले हुआ है या बाद में, पिता की संपत्ति में उसका हिस्सा भाई के बराबर ही होगा। वह संपत्ति चाहे पैतृक हो या फिर पिता की अपनी कमाई से अर्जित। हिंदू लॉ में संपत्ति को दो श्रेणियों में बांटा गया है- पैतृक और स्वअर्जित। पैतृक संपत्ति में चार पीढ़ी पहले तक पुरुषों की वैसी अर्जित संपत्तियां आती हैं जिनका कभी बंटवारा नहीं हुआ हो।

ऐसी संपत्तियों पर संतानों का, वह चाहे बेटा हो या बेटी, जन्मसिद्ध अधिकार होता है। 2005 से पहले ऐसी संपत्तियों पर सिर्फ बेटों को अधिकार होता था, लेकिन संशोधन के बाद पिता ऐसी संपत्तियों का बंटवारा मनमर्जी से नहीं कर सकता। यानी, वह बेटी को हिस्सा देने से इनकार नहीं कर सकता। कानून बेटी के जन्म लेते ही, उसका पैतृक संपत्ति पर अधिकार हो जाता है।

पिता की स्वअर्जित संपत्ति-

स्वअर्जित संपत्ति के मामले में बेटी का पक्ष कमजोर होता है। अगर पिता ने अपने पैसे से जमीन खरीदी है, मकान बनवाया है या खरीदा है तो वह जिसे चाहे यह संपत्ति दे सकता है। स्वअर्जित संपत्ति को अपनी मर्जी से किसी को भी देना पिता का कानूनी अधिकार है। यानी, अगर पिता ने बेटी को खुद की संपत्ति में हिस्सा देने से इनकार कर दिया तो बेटी कुछ नहीं कर सकती है।

अगर वसीयत लिखे बिना पिता की मौत हो जाती है–

अगर वसीयत लिखने से पहले पिता की मौत हो जाती है तो सभी कानूनी उत्तराधिकारियों को उनकी संपत्ति पर समान अधिकार होगा। हिंदू उत्तराधिकार कानून में पुरुष उत्तराधिकारियों का चार श्रेणियों में वर्गीकरण किया गया है और पिता की संपत्ति पर पहला हक पहली श्रेणी के उत्तराधिकारियों का होता है। इनमें विधवा, बेटियां और बेटों के साथ-साथ अन्य लोग आते हैं। हरेक उत्तराधिकारी का संपत्ति पर समान अधिकार होता है। इसका मतलब है कि बेटी के रूप में आपको अपने पिता की संपत्ति पर पूरा हक है।

अगर बेटी विवाहित हो-

2005 से पहले हिंदू उत्तराधिकार कानून में बेटियां सिर्फ हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) की सदस्य मानी जाती थीं, हमवारिस यानी समान उत्तराधिकारी नहीं। हमवारिस या समान उत्तराधिकारी वे होते/होती हैं जिनका अपने से पहले की चार पीढ़ियों की अविभाजित संपत्तियों पर हक होता है।

हालांकि, बेटी का विवाह हो जाने पर उसे हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) का भी हिस्सा नहीं माना जाता है।

 2005 के संशोधन के बाद बेटी को हमवारिस यानी समान उत्तराधिकारी माना गया है। अब बेटी के विवाह से पिता की संपत्ति पर उसके अधिकार में कोई बदलाव नहीं आता है। यानी, विवाह के बाद भी बेटी का पिता की संपत्ति पर अधिकार रहता है।

Tags: Ancestral PropertyAncestral Property after partitionAncestral Property meaningAncestral Property partitionAncestral Property rightsAncestral Property Supreme Court judgement
Previous Post

7th Pay Commission Latest Update: केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में होगी बंपर बढोतरी।पढ़िए पूरी जानकारी

Next Post

बिग ब्रेकिंग : युवाओं के साथ खिलवाड़।पटवारी भर्ती परीक्षा पेपर भी लीक। 4 दिन पहले हुई थी परीक्षा

Seemaukb

Seemaukb

Hi, I’m Seema Rawat, a passionate journalist and blogger. I’ve been writing for a long time on a variety of topics including sports, technology, finance, government jobs, health, and wealth. Through my articles and blogs, I aim to share reliable information, practical insights, and inspiring stories that help readers stay informed and empowered.

Related Posts

अब दफ्तरों के चक्कर नहीं! दिव्यांगजनों की शिकायतों के लिए सितंबर में लगेगा मोबाइल कोर्ट
उत्तराखंड

अब दफ्तरों के चक्कर नहीं! दिव्यांगजनों की शिकायतों के लिए सितंबर में लगेगा मोबाइल कोर्ट

by Seemaukb
August 11, 2026
किसानों के लिए बड़ी खबर! देहरादून में बढ़ेगी अरहर-उड़द-मसूर की खेती, 2030-31 तक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
उत्तराखंड

किसानों के लिए बड़ी खबर! देहरादून में बढ़ेगी अरहर-उड़द-मसूर की खेती, 2030-31 तक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

by Seemaukb
August 11, 2026
Next Post
बिग ब्रेकिंग : युवाओं के साथ खिलवाड़।पटवारी भर्ती परीक्षा पेपर भी लीक। 4 दिन पहले हुई थी परीक्षा

बिग ब्रेकिंग : युवाओं के साथ खिलवाड़।पटवारी भर्ती परीक्षा पेपर भी लीक। 4 दिन पहले हुई थी परीक्षा

Categories

  • Uncategorized
  • उत्तराखंड
  • एंटरटेनमेंट
  • क्राइम
  • क्रिकेट
  • टेक न्यूज़
  • देश-दुनिया
  • नौकरी
  • बाजार समाचार
  • मनी और निवेश
  • मौसम
  • राजनीती
  • रियल स्टेट
  • लाइफ स्टाइल
  • शिक्षा
  • हादसा
  • हेल्थ

Recommended

देहरादून के 465 दलित युवाओं की बदलेगी किस्मत! PMAJAY के तहत मिलेगा स्वरोजगार और स्किल ट्रेनिंग का लाभ

मसूरी के ‘द कियाना’ होमस्टे में रहस्यमय मौत का राज! डीएम ने बैठाई मजिस्ट्रेटी जांच

July 17, 2026
सोराग पुल मामले में जिलाधिकारी बागेश्वर का सचिव को पत्र,ठेकेदार,पीएमजीएसवाई और वाप्कोस पर बड़ी कार्यवाही तय

सोराग पुल मामले में जिलाधिकारी बागेश्वर का सचिव को पत्र,ठेकेदार,पीएमजीएसवाई और वाप्कोस पर बड़ी कार्यवाही तय

May 27, 2024

Don't miss it

कहीं फार्मासिस्ट नहीं, कहीं एक्सपायर दवाइयां! मसूरी में मेडिकल स्टोरों की जांच से मचा हड़कंप
क्राइम

कहीं फार्मासिस्ट नहीं, कहीं एक्सपायर दवाइयां! मसूरी में मेडिकल स्टोरों की जांच से मचा हड़कंप

August 11, 2026
अब दफ्तरों के चक्कर नहीं! दिव्यांगजनों की शिकायतों के लिए सितंबर में लगेगा मोबाइल कोर्ट
उत्तराखंड

अब दफ्तरों के चक्कर नहीं! दिव्यांगजनों की शिकायतों के लिए सितंबर में लगेगा मोबाइल कोर्ट

August 11, 2026
किसानों के लिए बड़ी खबर! देहरादून में बढ़ेगी अरहर-उड़द-मसूर की खेती, 2030-31 तक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
उत्तराखंड

किसानों के लिए बड़ी खबर! देहरादून में बढ़ेगी अरहर-उड़द-मसूर की खेती, 2030-31 तक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

August 11, 2026
सोना-चांदी खरीदने का सुनहरा मौका? 2 अगस्त के लेटेस्ट रेट ने दी राहत
मनी और निवेश

सोना-चांदी की कीमतों में तूफानी तेजी! 7 दिन में इतना महंगा हुआ Gold-Silver

August 11, 2026
एक ही बस, दो जांच और खुल गई पोल! रिश्वत के आरोपों से मचा हड़कंप
क्राइम

एक ही बस, दो जांच और खुल गई पोल! रिश्वत के आरोपों से मचा हड़कंप

August 11, 2026
JPSC-JSSC विवाद पर घिरी सरकार! छात्रों के आंदोलन पर खड़गे ने पूछा- कार्रवाई का आदेश किसने दिया?
देश-दुनिया

JPSC-JSSC विवाद पर घिरी सरकार! छात्रों के आंदोलन पर खड़गे ने पूछा- कार्रवाई का आदेश किसने दिया?

August 11, 2026
Uttarkhand Brodcast Logo

Uttarakhand Broadcast

Uttarakhand Broadcast एक विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल है, जहाँ आपको उत्तराखंड, भारत और दुनिया भर की ताज़ा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, शिक्षा और स्थानीय अपडेट्स सबसे पहले और सटीक जानकारी के साथ मिलते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक तेज़, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबरें पहुँचाना है।

Recent Posts

  • कहीं फार्मासिस्ट नहीं, कहीं एक्सपायर दवाइयां! मसूरी में मेडिकल स्टोरों की जांच से मचा हड़कंप
  • अब दफ्तरों के चक्कर नहीं! दिव्यांगजनों की शिकायतों के लिए सितंबर में लगेगा मोबाइल कोर्ट
  • किसानों के लिए बड़ी खबर! देहरादून में बढ़ेगी अरहर-उड़द-मसूर की खेती, 2030-31 तक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

Browse by categories

  • Uncategorized
  • उत्तराखंड
  • एंटरटेनमेंट
  • क्राइम
  • क्रिकेट
  • टेक न्यूज़
  • देश-दुनिया
  • नौकरी
  • बाजार समाचार
  • मनी और निवेश
  • मौसम
  • राजनीती
  • रियल स्टेट
  • लाइफ स्टाइल
  • शिक्षा
  • हादसा
  • हेल्थ

Calendar

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
« Jul    

© 2025 - All Right Reserved For Uttarakhand Broadcast Designed By Ashwani Rajput.

No Result
View All Result
  • Home
  • देश-दुनिया
  • उत्तराखंड
  • राजनीती
  • नौकरी
  • क्राइम
  • हेल्थ
  • हादसा
  • शिक्षा
  • More
    • एंटरटेनमेंट
    • बाजार समाचार
    • लाइफ स्टाइल
    • रियल स्टेट
    • मौसम
    • मनी और निवेश
    • टेक न्यूज़
    • क्रिकेट

© 2025 - All Right Reserved For Uttarakhand Broadcast Designed By Ashwani Rajput.