देहरादून: राजधानी देहरादून के सहसपुर विकासखंड की स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) से जुड़ी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। ये महिलाएं स्थानीय किसानों से ऑर्गेनिक और ताजी सब्जियां खरीदकर उन्हें सीमाद्वार स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों तक पहुंचा रही हैं।
जिला प्रशासन, उद्यान विभाग और ग्रामोत्थान (REAP) की संयुक्त पहल से शुरू हुई इस योजना ने ग्रामीण किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ-साथ महिलाओं को स्थायी रोजगार का नया माध्यम भी उपलब्ध कराया है।
उड़ान क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाएं संभाल रही हैं जिम्मेदारी
उद्यान विभाग और ग्रामोत्थान (REAP) के सहयोग से उड़ान क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाएं आईटीबीपी की मांग के अनुरूप नियमित रूप से ऑर्गेनिक एवं पौष्टिक सब्जियों की आपूर्ति कर रही हैं।
वर्तमान में आईटीबीपी की कुल आवश्यकता का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा सहसपुर की महिलाएं पूरा कर रही हैं। यदि मांग बढ़ती है तो विकासनगर, लांघा और डोईवाला क्षेत्रों के किसानों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।
स्थानीय किसानों को मिला बिना बिचौलियों के सीधा बाजार
सहसपुर ब्लॉक की नई पंचायत आमवाला (कोटरा संतूर) की महिलाएं गांव-गांव जाकर किसानों से ताजी सब्जियां एकत्रित करती हैं और सीधे आईटीबीपी तक पहुंचाती हैं।
इस व्यवस्था से किसानों को अब अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं और उनकी आमदनी में भी वृद्धि हुई है।
अप्रैल से अब तक पांच बार हुई सप्लाई
अप्रैल 2026 से शुरू हुई इस पहल के तहत अब तक आईटीबीपी को पांच बार ऑर्गेनिक सब्जियों की सफल आपूर्ति की जा चुकी है।
अब तक हुई सप्लाई का रिकॉर्ड
| तिथि | सप्लाई (किलोग्राम) |
|---|---|
| 29 अप्रैल | 317 किग्रा |
| 11 मई | 181 किग्रा |
| 29 मई | 209 किग्रा |
| 12 जून | 306 किग्रा |
| 2 जुलाई | 328 किग्रा |
कुल आपूर्ति: 1,341 किलोग्राम (13.41 क्विंटल)
इन ऑर्गेनिक सब्जियों की हो रही है सप्लाई
महिलाएं आईटीबीपी को नियमित रूप से निम्नलिखित सब्जियां उपलब्ध करा रही हैं—
- आलू
- टमाटर
- गोभी
- बैंगन
- लौकी
- भिंडी
- शिमला मिर्च
- मशरूम
- करेला
- धनिया
- कद्दू
- खीरा
महिलाओं को हो रहा आर्थिक लाभ
समूह की महिलाओं को प्रत्येक आपूर्ति पर अच्छा लाभ मिल रहा है। जिला परियोजना प्रबंधन इकाई (REAP) के अनुसार, प्रत्येक सप्लाई में महिलाओं को लगभग 1,000 से 2,000 रुपये तक की बचत हो रही है।
इसके अलावा, आईटीबीपी के साथ तय अनुबंध के तहत सब्जियों के दाम एक वर्ष के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिससे किसानों को मूल्य में उतार-चढ़ाव की चिंता नहीं रहती।
एक लाख रुपये से अधिक की सब्जियों की हो चुकी है सप्लाई
मुख्य उद्यान अधिकारी डी.के. तिवारी ने बताया कि अब तक आईटीबीपी को एक लाख रुपये से अधिक मूल्य की ऑर्गेनिक सब्जियां उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इस पहल से किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल रहा है और महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
महिला समूह ने बताया कैसे बदल रही है जिंदगी
समूह सदस्य लीना धीमान ने बताया कि ग्रामीण किसानों से ताजी सब्जियां एकत्रित कर आईटीबीपी तक पहुंचाई जा रही हैं। इससे जहां जवानों को पौष्टिक और ताजी सब्जियां मिल रही हैं, वहीं महिलाओं को रोजगार और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है।
डीएम डॉ. आशीष चौहान ने कही यह बात
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि यह पहल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
उन्होंने बताया कि अब तक 13 क्विंटल से अधिक ऑर्गेनिक सब्जियां आईटीबीपी को भेजी जा चुकी हैं। भविष्य में अधिक से अधिक महिलाओं को इस योजना से जोड़ने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी एवं उद्यान विभाग को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।
महिला सशक्तिकरण और ऑर्गेनिक खेती का सफल मॉडल
सहसपुर की यह पहल केवल सब्जियों की सप्लाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण रोजगार, ऑर्गेनिक खेती और किसानों की आय बढ़ाने का सफल मॉडल बनकर उभरी है। यदि भविष्य में इसकी मांग बढ़ती है तो उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रों की महिलाओं और किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।












