देहरादून। राजधानी देहरादून में आयोजित सरस फूड फेस्टिवल 2026 में उत्तराखंड के पहाड़ी स्वाद और स्थानीय उत्पादों की खूब धूम देखने को मिल रही है। 5 से 11 अक्टूबर तक आयोजित इस फेस्टिवल में 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र से पहुंची जय मातृ शक्ति स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों के जरिए लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। खास तौर पर मोरी की सेब की चटनी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
आत्मनिर्भर क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) से जुड़ी महिलाएं अपने हाथों से तैयार किए गए पहाड़ी व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों को देहरादून के बड़े बाजार तक पहुंचा रही हैं। उनके स्टॉल पर पतियुड के पकौड़े, सिद्दू, सेलू और उड़द की दाल के पकौड़े जैसे पारंपरिक व्यंजन उपलब्ध हैं। पहाड़ की रसोई से निकले इन व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए लोग स्टॉल पर पहुंच रहे हैं और महिलाओं के हुनर की सराहना कर रहे हैं।
मोरी की सेब चटनी बनी खास आकर्षण
सरस फूड फेस्टिवल में उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र की सेब की चटनी खास पहचान बना रही है। स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही इस चटनी का अनोखा स्वाद लोगों को पसंद आ रहा है। समूह से जुड़ी महिलाओं के मुताबिक, गांव में तैयार होने वाली सेब की चटनी करीब 300 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही है। इससे महिलाओं को अपने स्थानीय उत्पादों के जरिए सीधे आमदनी अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।
राजमा, लाल चावल, काला तिल और भट्ट की दाल की भी बिक्री
महिलाओं का प्रयास केवल पारंपरिक व्यंजनों को परोसने तक सीमित नहीं है। वे उत्तरकाशी के पारंपरिक कृषि उत्पादों को भी सीधे ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। हिलान्स के माध्यम से राजमा, लाल चावल, काला तिल और भट्ट की दाल जैसे पहाड़ी उत्पादों की बिक्री की जा रही है। इससे स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार में पहचान मिल रही है और ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।
इसके अलावा, जय मातृ शक्ति स्वयं सहायता समूह के मल्टीग्रेन बिस्किट भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। स्थानीय उत्पादों से तैयार किए जा रहे ये बिस्किट पारंपरिक स्वाद के साथ विविध अनाज से बने उत्पादों के विकल्प के रूप में पेश किए जा रहे हैं।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बड़ा बाजार बना सरस फूड फेस्टिवल
जय मातृ शक्ति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष मंजू राणा ने कहा कि सरस फूड फेस्टिवल ग्रामीण महिलाओं के लिए अपने पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का शानदार अवसर है। उन्होंने इस आयोजन के लिए जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया।
मंजू राणा के मुताबिक, इस तरह के आयोजनों से महिलाओं को अपनी प्रतिभा और मेहनत को पहचान दिलाने के साथ ही अपने उत्पादों के लिए नया बाजार तलाशने का अवसर मिलता है। पहले जिन उत्पादों की बिक्री गांव और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित रहती थी, वे अब देहरादून जैसे बड़े शहर के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।
उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से संचालित विभिन्न योजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं। इनके माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार के अवसर हासिल कर रही हैं और गांव में ही स्थानीय उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
पहाड़ की रसोई से बाजार तक पहुंच रही महिलाओं की मेहनत
सरस फूड फेस्टिवल 2026 में उत्तरकाशी की महिलाओं की भागीदारी ग्रामीण महिला सशक्तीकरण और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रही है। पहाड़ के खेतों और रसोई में तैयार होने वाले उत्पादों को बड़े शहर के बाजार तक पहुंचाकर महिलाएं अपने पारंपरिक हुनर को स्वरोजगार से जोड़ रही हैं।
यह आयोजन न केवल उत्तराखंड के पारंपरिक खानपान और स्थानीय उत्पादों को पहचान दिला रहा है, बल्कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपनी मेहनत के दम पर आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर भी दे रहा है।













