उत्तराखंड के हरिद्वार में ‘Ex Muslim यात्रा’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह यात्रा उत्तर प्रदेश के बिजनौर से शुरू होकर प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हर की पैड़ी के ब्रह्मकुंड पर समाप्त हुई, लेकिन इसके बाद से ही विरोध और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
क्या थी ‘Ex Muslim यात्रा’?
यह पदयात्रा 11 अप्रैल को बिजनौर के गंगा बैराज से शुरू हुई थी। इसमें शामिल लोगों का दावा है कि उन्होंने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाया है और ‘घर वापसी’ के बाद मां गंगा का आशीर्वाद लेने हरिद्वार पहुंचे।
यात्रा में संत रामविशाल दास महाराज सहित कई साधु-संत और हिंदू संगठनों के लोग भी शामिल बताए गए।
विवाद की असली वजह क्या है?
विवाद की जड़ हरकी पैड़ी क्षेत्र में प्रवेश को लेकर है।
श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि:
- यात्रा के आयोजकों ने झूठी जानकारी देकर परमिशन ली
- हरकी पैड़ी में नियमों के खिलाफ लोगों को ले जाया गया
- कुछ लोग गोल टोपी (मुस्लिम पहचान) में नजर आए
सभा का कहना है कि हरकी पैड़ी के नियमों के अनुसार इस तरह का प्रवेश प्रतिबंधित है।
गंगा सभा का क्या कहना है?
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम और तीर्थ पुरोहितों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि:
- उन्हें बताया गया था कि यात्रा में केवल धर्म परिवर्तन कर चुके लोग शामिल हैं
- लेकिन वायरल वीडियो में अलग स्थिति दिखाई दे रही है
- इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है
उन्होंने चेतावनी दी है कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई (FIR) भी कराई जा सकती है।
यात्रियों का पक्ष: ‘हमने सनातन अपनाया’
दूसरी ओर यात्रा में शामिल इमरोज आलम और अन्य लोगों का कहना है कि:
- उन्होंने स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाया है
- हर की पैड़ी पर गंगा पूजन करना उनका धार्मिक अधिकार है
- यात्रा का उद्देश्य शांति और सुरक्षा की भावना को बढ़ाना है
उनका यह भी कहना है कि उन्हें किसी तरह की प्रताड़ना न हो, इसलिए यह यात्रा निकाली गई।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, बढ़ा विवाद
जैसे ही यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, विवाद और तेज हो गया।
वीडियो में कुछ लोगों के पहनावे को लेकर सवाल उठाए गए, जिसके बाद स्थानीय संगठनों और धार्मिक संस्थाओं ने विरोध दर्ज कराया।
प्रशासन की भूमिका
पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि अभी तक प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की संभावना जताई जा रही है।
आस्था, नियम और पहचान के बीच टकराव
हरिद्वार की यह घटना केवल एक यात्रा का विवाद नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, परंपरा और प्रशासनिक नियमों के बीच संतुलन का मुद्दा बन गई है।
अब देखने वाली बात होगी कि:
- प्रशासन क्या कदम उठाता है
- क्या इस मामले में कार्रवाई होती है
- और भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए क्या नई गाइडलाइन बनती है













