देहरादून। उत्तराखंड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से 31 मार्च 2026 को संयुक्त निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए डॉ. अजीत मोहन जौहरी को सेवानिवृत्ति के लगभग दो माह के भीतर उत्तराखंड आयुर्विज्ञान परिषद (यूएमसी) में महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व सौंपे जाने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
उत्तराखंड आयुर्विज्ञान परिषद द्वारा 29 मई 2026 को जारी आदेश संख्या 4158 के अनुसार डॉ. जौहरी को डिप्टी रजिस्ट्रार (कार्यवाहक) के रूप में परिषद के दैनिक कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि यह व्यवस्था नियमित डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति होने तक प्रभावी रहेगी। वर्तमान में डॉ. जौहरी परिषद के सदस्य भी हैं।
आरटीआई के जरिए मांगी गई नियुक्ति से जुड़ी जानकारी
इस नियुक्ति के बाद प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के अनुपालन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट चन्द्रशेखर जोशी ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत परिषद से नियुक्ति से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है।
आरटीआई आवेदन में नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव, नोटशीट, फाइल अभिलेख, नियमावली, चयन प्रक्रिया, बैठक की कार्यवाही (मिनट्स), रिक्त पद की स्थिति तथा पूर्व डिप्टी रजिस्ट्रार से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा डॉ. जौहरी की वर्तमान नियुक्ति, पदनाम, वेतनमान तथा उनसे संबंधित प्रशासनिक आदेशों की जानकारी भी मांगी गई है।
चयन प्रक्रिया और नियमों पर उठे प्रश्न
आरटीआई आवेदन में यह भी पूछा गया है कि डिप्टी रजिस्ट्रार के नियमित पद पर नियुक्ति के लिए क्या कोई विज्ञापन जारी किया गया था, क्या किसी औपचारिक चयन प्रक्रिया का पालन किया गया तथा क्या अन्य पात्र अभ्यर्थियों पर भी विचार किया गया।
इसके साथ ही यह जानकारी भी मांगी गई है कि कार्यवाहक डिप्टी रजिस्ट्रार के रूप में डॉ. जौहरी को कोई अतिरिक्त प्रशासनिक, वित्तीय अथवा वैधानिक अधिकार प्रदान किए गए हैं या नहीं।
नियमित नियुक्ति को लेकर भी मांगा गया स्पष्टीकरण
जोशी ने परिषद से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि वर्तमान व्यवस्था केवल अंतरिम है या नियमित नियुक्ति होने तक जारी रहेगी। साथ ही नियमित डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी गई है।
अभिलेखों पर टिकी निगाहें
गौरतलब है कि राज्य के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों में शामिल रहे डॉ. अजीत मोहन जौहरी को सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी दिए जाने से स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक हलकों में चर्चा का माहौल है। अब निगाहें परिषद द्वारा आरटीआई के जवाब में उपलब्ध कराए जाने वाले अभिलेखों पर टिकी हैं, जिनसे यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित नियमों एवं पारदर्शिता के मानकों का किस हद तक पालन किया गया।
(नोट: नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठे प्रश्न आरटीआई आवेदन में मांगी गई सूचनाओं पर आधारित हैं। परिषद की ओर से आधिकारिक जवाब प्राप्त होने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।)











