Dehradun News: परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज के महानिर्वाण दिवस के पावन अवसर पर बुधवार को श्री दरबार साहिब, देहरादून में श्रद्धा, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने अपने पूज्य गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए श्री दरबार साहिब में मत्था टेका और मानव सेवा के संकल्प को दोहराया।
श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने की विशेष पूजा-अर्चना
महानिर्वाण दिवस पर श्री दरबार साहिब के पूजनीय सज्जादे गद्दी नशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने श्री झण्डे जी पर विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने समस्त मानव जाति के सुख, शांति, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना करते हुए अपने गुरु परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज का स्मरण किया।
देश-विदेश से पहुंची संगतों ने अर्पित की श्रद्धांजलि
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री दरबार साहिब पहुंचे। संगतों ने गुरु महाराज के श्रीचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके बताए सेवा, समर्पण, प्रेम और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर श्री दरबार साहिब परिसर में श्रद्धालुओं के लिए लंगर, प्रसाद और शबील की विशेष व्यवस्था की गई, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया।
सेवा दिवस के रूप में मनाया गया महानिर्वाण दिवस
परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज के महानिर्वाण दिवस को सेवा दिवस के रूप में मनाते हुए श्री दरबार साहिब परिसर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक रक्तदान करते हुए मानव सेवा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। शिविर में कुल 101 यूनिट रक्तदान संग्रहित किया गया। संगतों ने इसे अपने गुरु महाराज के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
रक्तदान करने वाले श्रद्धालुओं ने कहा कि “रक्तदान महादान है और जरूरतमंदों के जीवन की रक्षा करना ही सच्ची गुरु सेवा है।”
गुरु की शिक्षाओं को जीवन में उतारने का संदेश
महानिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं, बल्कि गुरु की शिक्षाओं को आत्मसात करने का पर्व भी है। परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज ने अपने जीवनकाल में सेवा, परोपकार, प्रेम और मानवता का जो संदेश दिया, उसी प्रेरणा से संगतों ने इस दिन को जनकल्याण, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के संकल्प के साथ मनाया।
पूरे श्री दरबार साहिब परिसर में गुरु भक्ति, सेवा भावना और आध्यात्मिक उल्लास का दिव्य वातावरण बना रहा।











