हरिद्वार। जनपद हरिद्वार में विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत अकोढ़ा खुर्द, विकासखंड लक्सर की ग्राम प्रधान बसंती देवी को पद से हटाने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई ग्राम पंचायत में हुए वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद की गई।
सीसी सड़क निर्माण में मिली गंभीर खामियां
मामला कश्यप बस्ती में सीसी सड़क निर्माण कार्य में घटिया सामग्री इस्तेमाल किए जाने की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के बाद सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी की जांच आख्या के आधार पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, हरिद्वार को जांच अधिकारी नामित किया।
जांच के दौरान ग्राम पंचायत के अभिलेखों, वित्तीय लेन-देन, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत जांच की गई। जांच में पाया गया कि कई विकास कार्यों, विशेष रूप से सीसी सड़क निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। सड़क किनारे नाली निर्माण में तकनीकी त्रुटियां भी सामने आईं।
एक ही सड़क दिखाकर किया गया भुगतान
जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कई स्थानों पर एक ही सड़क को अलग-अलग दर्शाकर भुगतान किया गया। इसके अलावा ग्राम पंचायत के महत्वपूर्ण अभिलेख जैसे बैंक पासबुक, कैशबुक, स्टॉक रजिस्टर, कार्य पंजिका और वित्तीय वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 से जुड़े रिकॉर्ड समय पर प्रस्तुत नहीं किए गए।
अधिकारियों के अनुसार, अभिलेखों के रख-रखाव में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका और मजबूत हुई।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर भी मिली विसंगतियां
जांच में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज सूचनाओं और धरातल पर हुए कार्यों के बीच भारी अंतर पाया गया। कई कार्य वित्तीय वर्ष 2023-24 में दर्शाए गए, जबकि उनका भुगतान और क्रियान्वयन बाद के वर्षों में किया गया।
इसके साथ ही योजनाओं के चयन और अनुमोदन में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने की बात भी सामने आई।
निजी लाभ पहुंचाने के आरोप
जांच रिपोर्ट के अनुसार कुछ निर्माण कार्य सार्वजनिक हित के बजाय निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए। कई सड़कें निजी भूमि और व्यक्तिगत पहुंच मार्ग के रूप में बनाई गईं, जो नियमों के विरुद्ध पाया गया।
ग्राम प्रधान प्रथम दृष्टया दोषी
जांच में ग्राम प्रधान श्रीमती बसंती देवी को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। उनके द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण को असंतोषजनक बताते हुए आरोपों का संतोषजनक खंडन नहीं माना गया।
वहीं ग्राम पंचायत विकास अधिकारी शंकरदीप की भूमिका भी अभिलेखों के रख-रखाव और प्रस्तुतिकरण में लापरवाहीपूर्ण पाई गई। अन्य संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी में कमजोर पाई गई है।
जिलाधिकारी ने दिए सख्त निर्देश
उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 की धारा-138(1) के तहत कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान बसंती देवी को पद से हटाने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी धनराशि की वसूली और अन्य संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने स्पष्ट कहा है कि जनपद में विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।











