बड़कोट | यमुनोत्री हाईवे पर स्थित स्यानाचट्टी (Syanachatti) में पिछले वर्ष आई विनाशकारी आपदा को लगभग एक वर्ष पूरा होने वाला है, लेकिन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित स्थायी सुरक्षात्मक कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। मानसून सीजन की शुरुआत के साथ ही स्थानीय लोगों, व्यापारियों और होटल संचालकों की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं।
पिछले वर्ष आई थी भीषण आपदा
28 जून 2025 को कुपड़ा खड्ड (Kupda Khad) से आए भारी मलबे और विशाल बोल्डरों ने यमुना नदी के प्रवाह को बाधित कर दिया था। नदी का रास्ता अवरुद्ध होने से स्यानाचट्टी क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे।
आपदा के दौरान कई होटल, स्कूल, दुकानें और अन्य भवन जलमग्न हो गए थे। इस घटना में स्थानीय लोगों और कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। यमुनोत्री धाम यात्रा मार्ग भी प्रभावित हुआ था, जिससे पर्यटन और स्थानीय व्यवसायों पर प्रतिकूल असर पड़ा।
स्थायी सुरक्षा कार्य अब तक अधूरे
आपदा के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा नदी से मलबा हटाने तथा कुछ अस्थायी राहत कार्य किए गए थे। हालांकि, क्षेत्र को भविष्य की आपदाओं से सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक स्थायी सुरक्षा उपाय अभी तक शुरू नहीं हो सके हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले एक वर्ष में केवल मलबे को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने का कार्य किया गया है, जबकि नदी प्रशिक्षण (River Training), तट सुरक्षा (Embankment Protection) और अन्य दीर्घकालिक सुरक्षात्मक संरचनाओं के निर्माण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
मानसून से पहले बढ़ी लोगों की चिंता
ग्रामीणों और व्यापारियों के अनुसार वर्तमान में भी यमुना नदी और कुपड़ा खड्ड के आसपास बड़ी मात्रा में मलबा जमा हुआ है। कई स्थानों पर नदी का बहाव क्षेत्र संकरा बना हुआ है, जिससे भारी वर्षा के दौरान पुनः मलबा आने और जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा कार्य शुरू नहीं किए गए तो आगामी मानसून के दौरान क्षेत्र को फिर से गंभीर नुकसान झेलना पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने उठाए प्रशासन पर सवाल
क्षेत्रवासियों का कहना है कि पिछले वर्ष की आपदा ने स्यानाचट्टी की संवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से उजागर कर दिया था। इसके बावजूद स्थायी समाधान में हो रही देरी प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है।
ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि मानसून के दौरान किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए जल्द से जल्द सुरक्षात्मक कार्य शुरू किए जाएं, ताकि भविष्य में जान-माल की हानि को रोका जा सके।
24.50 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृति के अंतिम चरण में
इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्यानाचट्टी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए लगभग 24.50 करोड़ रुपये की लागत से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और प्राक्कलन तैयार किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार योजना की स्वीकृति प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बजट स्वीकृत होते ही तटबंध निर्माण, नदी प्रशिक्षण कार्य और अन्य स्थायी सुरक्षा उपायों पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
पहली बरसी से पहले भी इंतजार जारी
आपदा की पहली बरसी नजदीक आने के बावजूद स्यानाचट्टी के लोग अभी भी स्थायी सुरक्षा इंतजामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मानसून की दस्तक के साथ क्षेत्र में फिर से अनिश्चितता और भय का माहौल बन गया है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं किए गए, तो पिछले वर्ष जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है। ऐसे में शासन और प्रशासन के लिए यह समय पर कार्रवाई करने की बड़ी चुनौती है।












